29 मई, 2022 को प्रसिद्ध पंजाबी गायक शुभदीप सिंह उर्फ सिद्धू मूसेवाला की हत्या ने दुनिया भर में रहते उनके प्रशंसकों, शुभचिंतकों को झकझोर दिया था। इसका असर साफ तौर पर पंजाब की सियासत पर दिखाई दिया था।
सिद्धू मूसेवाला की हत्या का दर्द अब भी युवा वर्ग में है और मूसेवाला के प्रति नौजवानों का लगाव किसी से छिपा नहीं है। मूसेवाला फैक्टर से पंजाब खासकर मालवा की सियासत इस बार भी प्रभावित होगी। सियासी दल भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने लगे हैं और सत्ताधारी पार्टी आप को घेरने लगे हैं। हालांकि, 1 मई को ही इस मामले में मानसा जिला अदालत ने 25 लोगों पर आरोप तय कर दिए हैं, जिससे मूसेवाला के परिजनों में इंसाफ मिलने की उम्मीद जगी है।
राजधानी गंवाकर चुकानी पड़ी थी कीमत
सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के एक माह बाद 23 जून, 2022 को संगरूर संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में आम आदमी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। यहां से शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के सिमरनजीत सिंह मान ने चुनाव जीता था। इसकी सबसे अहम वजह नौजवान वर्ग में मूसेवाला की हत्या को लेकर सरकार के प्रति नाराजगी मानी गई थी। इस बार सिद्धू मूसेवाला की पुण्यतिथि के दो दिन बाद पंजाब में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान होगा।
जानकार मानते हैं कि सिद्धू मूसेवाला का मामला एक बार फिर मालवा की सियासत को प्रभावित करेगा। इसकी अहम वजह ये है कि सिद्धू मूसेवाला को लेकर नौजवान वर्ग में जबरदस्त क्रेज बरकरार है और युवा वर्ग अपने वाहनों पर मूसेवाला के स्टिकर, पोस्टर व झंडे चिपकाए रहते हैं। इसके अलावा मूसेवाला की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहने देखे जा सकते हैं। मालवा की संगरूर, बठिंडा, फरीदकोट, पटियाला सीटों पर सिद्धू मूसेवाला प्रकरण का व्यापक असर दिख सकता है।
दीप सिद्धू का दिखा था असर
मालवा में दीप सिद्धू का असर भी दिख चुका है। विधानसभा चुनाव में अकाली दल अमृतसर, युवा मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने में सफल रहा था। अमरगढ़ विधानसभा क्षेत्र में अकाली दल अमृतसर के सिमरनजीत सिंह मान को 38 हजार से ज्यादा वोट मिले थे और वे आप से 6 हजार मतों से हारे थे। सिद्धू मूसेवाला और दीप सिद्धू दोनों ही सिमरनजीत सिंह मान के प्रति सहानुभूति रखते थे।
विपक्षी दल उठा रहे मुद्दा
युवा मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए तमाम विपक्षी दल सिद्धू मूसेवाला के मुद्दे को उठाकर सरकार को घेर रहे हैं। कांग्रेस के प्रत्याशी व विधायक सुखपाल सिंह खैरा आरोप लगा रहे हैं कि मूसेवाला की सुरक्षा वापस लेकर उसे सार्वजनिक किया गया था। यह किसी सुनियोजित साजिश के तहत किया गया था। अब आरोपियों को बचाने की कोशिश हो रही है। पीड़ित माता-पिता इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। अकाली दल और भाजपा भी इस मामले में आप सरकार को घेर रही हैं। अकाली दल अमृतसर के सिमरनजीत सिंह मान भी सरकार पर जोरदार हमला बोल रहे हैं। बहरहाल, पंजाब में हर दिन नए मुद्दे मुखर हो रहे हैं। यहां नौजवानों की भावनाओं से जुड़े मुद्दे तस्वीर बदलने का माद्दा रखते हैं। ऐसे में सिद्धू मूसेवाला मामले को कम करके नहीं आंका जा सकता है।
कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि सिद्धू मूसेवाला के प्रति सभी के दिल में दर्द है। एक जवान बेटे की हत्या का दर्द असहनीय है। सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है और अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं, लेकिन इस मुद्दे पर सियासी रोटियां सेंकना कहां की नैतिकता है। सियासी दलों को राजनीति नहीं करनी चाहिए।