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चंडीगढ़ : टालमटोल के बाद आखिरकार पुलिस संबंधी बयान पर सिद्धू ने मांगी माफी

Thu, 30 Dec 2021 01:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़

सार

बोले, इस तरह की बातें चुनाव के दौरान मुद्दा बना ली जाती हैं लेकिन इच्छा किसी को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। 
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Navjot Sidhu - फोटो : ANI
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विस्तार
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पुलिस फोर्स के बारे में आपत्तिजनक बयान देकर चौतरफा हमलों में घिरे पंजाब प्रदेश कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने आखिरकार बुधवार को सार्वजनिक तौर पर माफी मांग ली। उन्होंने आपत्तिजनक बयान बीते सप्ताह सुलतानपुर लोधी और बटाला में कांग्रेस की जनसभाओं को संबोधित करते हुए मंच से दिए थे।

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एक सार्वजनिक इंटरव्यू के दौरान सिद्धू से जब उनके पुलिस फोर्स संबंधी बयान के बारे में सवाल किए गए तो सिद्धू ने पहले तो टालमटोल करते हुए कहा कि वह कई जगह काफी लंबे-चौड़े भाषण देते हैं, लेकिन इस तरह की बातें चुनाव के दौरान मुद्दा बना ली जाती हैं। फिर भी अगर उनके बयान से किसी को ठेस पहुंची है तो वह माफी मांगते हैं। सिद्धू ने कहा कि यह बात तो वह बीते 15 साल से कहते रहे हैं, लेकिन ऐसा कहते हुए उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। 

सिद्धू ने अपने बयान को स्पष्ट करने का प्रयास करते हुए कहा कि उनके कहने का मतलब यह है कि एक व्यक्ति ऐसा है जो पुलिस को भी डरा देता है। फिर भी अगर किसी को ठेस पहुंची है तो वह माफी मांगते हैं। 
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यह था आपत्तिजनक बयान
सुलतानपुर लोधी में कांग्रेस विधायक नवतेज सिंह चीमा के पक्ष में चुनाव रैली और बटाला में कांग्रेस नेता अश्विनी सेखड़ी के पक्ष में चुनाव रैली के दौरान नवजोत सिंह सिद्धू ने उक्त दोनों नेताओं के हवाले से कहा था कि ये नेता जरा खंगारते भी हैं तो थानेदार की पैंट गीली कर देते हैं।

पुलिस अफसरों और विपक्ष ने किया था विरोध
सिद्धू के इस बयान को लेकर उस समय विवाद बढ़ गया जब चंडीगढ़ के एक डीएसपी दिलशेर सिंह चंदेल, जालंधर पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर बलबीर सिंह और अमृतसर के एक हवलदार संदीप सिंह ने सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड करके सिद्धू के बयान की कड़ी आलोचना की। डीएसपी दिलशेर सिंह ने तो सिद्धू के खिलाफ मानहानि का दावा भी दायर कर दिया है। 

उधर, सियासी दलों ने भी सिद्धू के बयान की आलोचना की। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, कांग्रेसी सांसद रवनीत सिंह बिट्टू, शिअद, भाजपा और आप के नेताओं ने सिद्धू को घेरते हुए मुख्यमंत्री चन्नी और गृह मंत्री सुखजिंदर रंधावा की चुप्पी पर सवाल उठाए थे।
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