पतियों की सलामती के लिए रखे जाने वाले व्रत भारतीय महिलाओं के लिए नई परेशानी लेकर आ रहे हैं। व्रत रखने से महिलाओं के मस्तिष्क में ग्लूकोज की सप्लाई बंद हो जाती है। शुगर का लेवल कम होते ही सिर में दर्द शुरू होने लगता है।
इसका असर में पेट में दिखने लगता है। इंडिया के हेडेक किंग व मुंबई के लीलावती हास्पिटल में हेडेक एंड माइग्रेन क्लीनिक के प्रमुख डा. के रविशंकर ने बताया कि यदि समय पर इसका इलाज नहीं कराया गया तो अन्य मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं।
ये दिक्कत उन महिलाओं में सबसे ज्यादा आती है, जो साल में एक या दो बार ही व्रत रखती हैं। डा. रविशंकर पीजीआई में आयोजित न्यूरोलॉजी की एनुअल कांफ्रेंस में विशेष रूप से हिस्सा लेने के लिए आए हुए थे।
करवा चौथ के अगले दिन दोगुने मरीज
हेडेक (सिरदर्द) स्पेशलिस्ट डा.रविशंकर ने बताया कि करवाचौथ के अगले दिन उनके क्लीनिक में दोगुने मरीज बढ़ जाते हैं। छुट्टी होने के बावजूद क्लीनिक खोलना पड़ता है। ऐसी महिलाओं को किसी अच्छे डाक्टर से परामर्श लेने के बाद व्रत रखना चाहिए।
पुरुषों के बजाए महिलाओं में सिरदर्द की सबसे ज्यादा शिकायत रहती है। उन्होंने बताया कि सिरदर्द को कभी भी हलके में नहीं लेना चाहिए। दवाएं तो बिना पूछे खानी ही नहीं चाहिए। लोग दवाएं खाते रहते हैं और डाक्टर को नहीं दिखाते। इसी में काफी देरी हो जाती है।
स्कूलों में स्ट्रेस खतरनाक
उनके मुताबिक मौजूदा समय में स्कूलों में काफी स्ट्रेस है। इससे बच्चों में भी हेडेक की काफी समस्या देखी जा रही है। माता-पिता समझते हैं कि बच्चे को नेत्र संबंधी रोग है, लेकिन ऐसा होता नहीं।
उन्हें तुरंत न्यूरोलाजिस्ट को दिखाना चाहिए। सुबह के वक्त ब्रेकफास्ट छोड़ने वालों को भी हेडेक की समस्या आती है। वातावरण और जेनेटिक की वजह से भी सिरदर्द की शिकायत रहती है।
मोबाइल से ज्यादा देर तक बातचीत से मुश्किलें
उन्होंने बताया कि उनके क्लीनिक में मोबाइल से ज्यादा बातचीत करने से भी हेडेक की समस्या आ रही है। मोबाइल से बातचीत करते वक्त कई बार लोगों की गर्दन की एक तरफ झुक जाती है और उसी एंगल पर काफी देर तक उनकी गर्दन रहती है।
यह समस्या उन लोगों में सबसे ज्यादा आती है, जो कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करते हैं। इससे गर्दन पर दर्द आता है और उससे सिर में दर्द शुरू हो जाता है।
सिरदर्द एक भयंकर समस्या है। इसके कारण लोग नौकरी तक छोड़ देते हैं। इसके बचने का एक ही तरीका है कि सिरदर्द को लोग चश्मे वाला दर्द और साइनस न समझे। लाइफ स्टाइल चेंज करें। जंक फूड खाना छोड़ दें।
डा. के रविशंकर, स्पेशलिस्ट इन हेडेक मैनेजमेंट