श्राद्ध पक्ष के दौरान धार्मिक आस्था के चलते गोवंश को अधिक पकवान खिलाना उनकी मौत का कारण बन सकता है। अधिक तैलीय भोजन देने से गोवंश रूमन एसिडोसिस (एक तरह का तेजाब) की चपेट में आ सकते हैं। इससे गोवंशों की आंतों में अम्ल की अधिकता हो जाती है और पाचन खराब हो सकता है।
खून के साथ तेजाब का मिश्रण हो सकता है। साथ ही फेफड़े और हृदय काम करना बंद कर देते हैं। सांस लेने में दिक्कत बढ़ जाती है। इससे गोवंश की मौत हो सकती है। हरियाणा पशुपालन एवं डेयरी विभाग के निदेशक डॉ. प्रेम सिंह ने बताया कि गोवंश के पेट में भोजन पचाने के लिए सूक्ष्म जीव (रूमन माइक्रो फ्लोरा) काम करते हैं। तैलीय भोजन जैसे पूड़ी, हलवा आदि से इन सूक्ष्म जीवों पर वसा की परत चढ़ जाती है। इससे सूक्ष्म जीव भोजन पचाना बंद कर देते हैं। इस कारण से गोवंश के पेट में अफरा बनने लगता है।
ये हैं बीमारी के लक्षण
- यदि गोवंश सिर नीचे करके बैठा है। चलते समय लंगड़ा रहा है या बैठा है और जुगाली नहीं कर रहा।
- गोवंश का पेट भी फूल जाता है और पेट से पानी जैसी आवाज
- दुधारू गोवंश का दूध उत्पादन कम हो जाता है। सुस्ती के साथ भोजन कम कर देता है।
- उपचार : प्राथमिक उपचार के रूप में गोवंश को गुनगुने पानी के साथ 50 से 100 ग्राम तक मीठा सोडा दें। भोजन में केवल सूखी घास या सूखी तूड़ी ही दें। इससे हाजमा दुरुस्त होगा।