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अमर उजाला पड़ताल: डॉक्टरों पर जेनरिक दवाएं लिखने का दबाव, केंद्रों पर खांसी-जुकाम तक की गोली उपलब्ध नहीं

Wed, 23 Aug 2023 03:52 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

जेनरिक दवाओं के एक डिस्ट्रीब्यूटर ने बताया कि शुगर, बीपी, न्यूरो, लिवर की दवाओं की दिल्ली से आपूर्ति पिछले डेढ़ महीने से लगातार बंद है। बार-बार डिमांड भेजने के बावजूद स्टॉक नहीं मिल रहा है जबकि सबसे ज्यादा इसकी ही दवाएं मरीज खरीदते हैं।
 
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विस्तार
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मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए डॉक्टरों पर जेनरिक दवाएं लिखने का लगातार दबाव बनाया जा रहा है। अब तो सॉल्ट नेम न मिलने वाले डॉक्टर का लाइसेंस तक रद्द करने की चेतावनी जारी की जा चुकी है। इतना ही नहीं, ब्रांडेड कंपनियों के सॉल्ट भी नहीं लिखे जाने का निर्देश दिया गया है। यह आदेश डॉक्टरों के साथ मरीजों के लिए भी मर्ज बनता जा रहा है। कारण, शहर के जन औषधि केंद्रों पर दवाओं का उपलब्ध न होना है। 
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अमर उजाला ने पीजीआई, जीएमसीएच 32 और जीएमएसएच 16 के जन औषधि केंद्रों की पड़ताल की। इस दौरान केंद्रों पर लिवर, शुगर, बीपी और न्यूरो की दवाएं नहीं मिलीं। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन जन औषधि केंद्रों के बल पर गंभीर मरीजों के इलाज की तैयारी है, वहां सर्दी-जुकाम तक की दवा नहीं मिल रही।

पीजीआई के एक डॉक्टर का कहना है कि संस्थान के शोध में यह साबित हुआ है कि जेनरिक दवाएं कम कारगर हैं। इसके बावजूद मरीजों को जेनरिक दवाएं लिखने के लिए दबाव बनाया जा रहा है जबकि मरीज खुद जेनेरिक दवा की जगह ब्रांडेड लिखने को कह रहे हैं। वहीं, जीएमसीएच 32 के डॉक्टरों का कहना है कि जेनरिक न लिखने वालों को डराया जा रहा है। ऐसे में मरीजों का हित दरकिनार कर निर्देश का पालन करना मजबूरी हो गई है जबकि जीएमएसएच 16 के डॉक्टर इस बात से परेशान हैं कि जेनरिक दवा उपलब्ध न होने से मरीजों का इलाज प्रभावित होने लगा है।
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डेढ़ महीने से ज्यादा परेशानी
जेनरिक दवाओं के एक डिस्ट्रीब्यूटर ने बताया कि शुगर, बीपी, न्यूरो, लिवर की दवाओं की दिल्ली से आपूर्ति पिछले डेढ़ महीने से लगातार बंद है। बार-बार डिमांड भेजने के बावजूद स्टॉक नहीं मिल रहा है जबकि सबसे ज्यादा इसकी ही दवाएं मरीज खरीदते हैं। इस कारण जन औषधि केंद्रों पर आपूर्ति प्रभावित हो रही है। पीजीआई, जीएमसीएच 32 और जीएमएसएच 16 समेत सेक्टर 45, मलोया और मनीमाजरा के केंद्रों पर आपूर्ति बाधित है।

बस जनता को मूर्ख बनाने की कवायद है
सस्ती दवा के नाम पर लगातार आदेश जारी किए जा रहे हैं लेकिन वे अधिकारी ये नहीं बताते कि सस्ती दवा मिलेगी कब। कुल मिलाकर जनता को मूर्ख बनाने का काम ही किया जा रहा है। - राम गुप्ता, इंदिरा कॉलोनी

सरकारी अस्पताल में डॉक्टर मिल जाएं यही बहुत है। सस्ती दवा के पीछे भागे तो पता चला बीमार ही रहना होगा। प्रशासन बिना प्लानिंग के नई-नई योजनाएं लागू करता जाता है। जेनरिक दवाएं भी उन्हीं योजनाओं में से एक है, जो पूरा होना मुश्किल है।- करनदीप सिंह, रायपुर खुर्द

इन दवाओं की डिमांड सबसे ज्यादा, पर उपलब्ध नहीं
सॉल्ट नेम                             बीमारी          जेनरिक दाम                ब्रांडेड में दाम
उर्सोडॉक्सिकोलिक एसिड        लिवर       160 रुपये में 10 गोली         645 रुपये
मेटफार्मिंग ग्लीमिप्राइड            शुगर           33 रुपये 10 गोली            142 रुपये
एम्लोडिपिन 500 एमजी            बीपी            5 रुपये में 10 गोली            35 रुपये
गाबापेंटीन मिथाईलकोबालामिन  न्यूरो         44 रुपये में 10 गोली           250 रुपये
नॉटट्रीप्टालीन            
बिल्डरग्लिप्टिन मेटफार्मिन हाइड्रोक्लोराइड शुगर  40 रुपये 15 गोली         338 रुपये

जेनेरिक दवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। जिसके कारण जन औषधि केंद्रों पर स्टॉक कम हो रहा है। स्टॉक मेनटेन रखने के लिए लगातार डिमांड भेजी जा रही है। जो दवाएं उपलब्ध नहीं हैं उसकी जल्द ही आपूर्ति हो जाएगी। -विनय मिश्रा, जन औषधि केंद्र के क्षेत्रीय अधिकारी

मरीजों के हित को ध्यान में रखते हुए अस्पताल के सभी डॉक्टर जेनरिक दवाएं ही लिख रहे हैं। जहां तक दवाओं की कमी की बात है तो उसकी आपूर्ति दिल्ली से होती है। - डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच 32

मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए इमरजेंसी में भी जन औषधि केंद्र खोलने की तैयारी है। संस्थान में पहले से दो जन औषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं। पीजीआई में मरीजों का दबाव बहुत ज्यादा है। ऐसे में दवाओं का स्टॉक मेनटेन करने में थोड़ी परेशानी होती है। - प्रो. विवेक लाल, निदेशक पीजीआई
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