कर्ज के बोझ तले जहां पंजाब में किसान आत्महत्या कर रहा है, वहीं उनकी पत्नियां अब उनके कर्ज के साथ अपनी जिंदगी को बोझ समझ जी रही हैं। पंजाब के इस दर्द को चंडीगढ़ के दर्शकों तक पहुंचाया फिल्म ‘कैंडल इन द विंड’ ने। इस फिल्म ने दर्शकों की आंखों में आंसू तक ला दिए।
शुक्रवार शाम इस फिल्म के साथ गवर्नमेंट आर्ट गैलरी एंड ऑडिटोरियम में तीन दिवसीय शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल का आयोजन हुआ। यह चंडीगढ़ क्रिएटिव सिनेमा सर्कल द्वारा कराया जा रहा है। नेशनल अवार्ड विनर नंदन सक्सेना और कविता बहल द्वारा निर्देशित इस फिल्म को बठिंडा, मानसा और संगरूर में फिल्माया गया है।
फिल्म शुरू होती है बठिंडा में मौजूद सतविंदर कौर से, जो अपने पति के आत्महत्या करने के बाद परिवार को पाल रही है। सतविंदर पर 30 लाख को कर्ज है और गुजारे के लिए सिर्फ एक भैंस और बछड़ा। सतविंदर की तरह कुछ और औरतें भी हैं।
फिल्म के कई शॉट बेरहम जिंदगी को दर्शाते हैं तो कुछ सरकार के झूठे वादों की पोल खोलते हैं। फिल्म का अंत बेहद दिल को छूने वाला है जिसमें निर्देशिका एक गरीब परिवार को पैसे देना चाहती है लेकिन वह उसे मना कर देता है। यह कहकर कि वह उनसे छोटी है और छोटों से कभी पैसे नहीं लेते।
फिल्म के इस मार्मिक दृश्य ने हॉल में मौजूद लोगों को रोने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद नंदन और कविता ने दर्शकों से बात की। फिर उनकी एक और फिल्म डैम्ड को भी दिखाया गया।