शिव कुमार बटालवी और कुमार विकल अक्सर रात में मेरे दफ्तर के नीचे आते थे, फिर हम घूमने निकल जाते थे। कई बार वह शराब पीकर सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर के पीछे की दीवार पर चॉक या कोयला से कविता लिखते थे। मेरी काम था कि सुबह सुबह उठकर उस नज्म को कागज पर लिखना और उन्हें सौंपना। यह बात शिव कुमार बटालवी के दोस्त और हरियाणा उर्दू अकादमी पंचकूला के निदेशक डॉ. चन्द्र त्रिखा ने शुक्रवार को पीयू में शिव बटालवी पर आयोजित परिचर्चा के दौरान साझा कीं।
डॉ. त्रिखा ने बताया कि आमतौर पर शिव कुमार बटालवी रोमांटिक कविता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन अगर बारीकी से अध्ययन करें तो पाएंगे कि उन्होंने समाज के विभिन्न सरोकारों पर भी कविता लिखी है। उन्होंने विशेष तौर पर शिव कुमार बटालवी और कुमार विकल के साथ बिताए वक्त के कई निजी अनुभव सभी के साथ साझा किए। परिचर्चा के बाद विभाग की शोध पत्रिका ‘परिशोध’ में जिन शोधार्थियों के आलेख प्रकाशित हुए हैं उनको उसकी एक- एक प्रति डॉ. चन्द्र त्रिखा के द्वारा भेंट की गई।
इनमें रामसिंह यादव, हैप्पी, मुलायम यादव, नवीन कुमार नीरज, सुअम्बदा, बलजीत कौर, प्रवीन मलिक और शकुंतला शामिल हैं। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह, प्रो. सत्यपाल सहगल और जनसंचार विभाग से डॉ. भवनीत भट्टी उपस्थित रहीं। इस कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी बोबिजा द्वारा किया गया।