शिरोमणि अकाली दल प्रधान सुखबीर बादल को अध्यक्ष पद से हटाए जाने को लेकर पार्टी के कुछ नेता बागी हो गए हैं। ये सभी बागी नेता पार्टी की कोर कमेटी के मौजूदा सदस्य थे। सुखबीर बादल ने कमेटी को भंग करके बागियों को सख्त संदेश दिया है।
श्री अकाल तख्त के सामने पेश होने से पहले मंगलवार को चंडीगढ़ में पार्टी कार्यालय में शिअद प्रमुख सुखबीर बादल की अध्यक्षता में एक बैठक हुई। इसमें शिरोमणि अकाली दल की कोर कमेटी को भंग कर दिया गया।
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बैठक में मौजूद नेताओं ने सुखबीर बादल को नए सिरे से कोर कमेटी के गठन किए जाने को लेकर प्रस्ताव रखा, जिस पर सुखबीर ने मौजूदा कोर कमेटी को भंग कर दिया। कोर कमेटी को भंग करने के पीछे प्रमुख कारण यह है कि पार्टी चीफ सुखबीर बादल को प्रधान पद से हटाए जाने को लेकर एकजुट हुए बागी नेता इस कमेटी के मौजूदा सदस्य थे। आखिरी बार शिअद की कोर कमेटी में 30 नवंबर 2022 को बदलाव हुए थे। अब बगावत के सुर उठने पर एक बार फिर पार्टी हाईकमान ने कोर कमेटी में बदलाव के प्रस्ताव को मंजूर करते हुए इसे भंग कर दिया है।
यह फैसला पार्टी प्रमुख की अध्यक्षता में हुई बैठक में हुआ, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा, हरजिंदर सिंह धामी, बलविंदर सिंह भूंदड़, महेशइंद्र सिंह ग्रेवाल, परमजीत सिंह सरना, इकबाल सिंह झूंडा और हरचरण सिंह बैंस मौजूद थे। इसके अलावा प्रदेश में चार विधानसभा क्षेत्रों में उप चुनाव को लेकर चर्चा हुई।
बागियों को सख्त संदेश
श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होने से पहले सुखबीर बादल के इस ठोस कदम से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि पार्टी किसी भी समझौते या बागी नेताओं के मकसद को कामयाब न होने देने के लिए तैयार है। अकाल तख्त के समक्ष बागी नेताओं ने बीते दिनों पेश होकर लिखित रूप में प्रदेश में अकाली सरकार के समय में हुए बेअदबी की घटनाओं, पंथक मुद्दों को पूरा नहीं करने और अन्य गलतियों को स्वीकार करते हुए माफी मांगी थी। यहां तक की बागी नेताओं ने पार्टी प्रमुख सुखबीर बादल पर इन सभी घटनाओं पर सरकार में रहते हुए कार्रवाई नहीं किए जाने की मंशा पर आरोप लगाया था, जिस पर श्री अकाल तख्त साहिब ने बादल को 15 दिन के अंदर पेश होकर जवाब देने के लिए कहा था। भंग हुई शिअद की कोर कमेटी में पार्टी प्रमुख सुखबीर बादल को प्रधान पद से हटाये जाने को लेकर एकजुट बागी नेताओं के नाम शामिल थे। इनमें गुरप्रताप सिंह वडाला, सिकंदर सिंह मलूका, प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा, सुरजीत सिंह रखड़ा जैसे नेता शामिल थे।