हरियाणा के चुनावी रण में शनिवार से एचएसजीएमसी का मुद्दा गरमाने जा रहा है। इनेलो के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रहे शिरोमणि अकाली दल (शिअद) का मुख्य फोकस इसी मुद्दे पर रहेगा।
ऐसा नहीं कि शिअद अन्य मुद्दों को दरकिनार कर देगा, लेकिन एचएसजीएमसी एक ऐसा मसला है जो कि सिखों से सीधा जुड़ा है। इसे लेकर कांग्रेस व शिअद के बीच सीधा टकराव है और प्रचार के दौरान आगामी दस दिनों में इस मुद्दे पर परस्पर विरोधी तल्ख बयानबाजी संभावित है।
शिअद से संबद्ध पंजाब के मंत्री, सांसद, मुख्य संसदीय सचिव, विधायक, चेयरमैन आदि सहित पार्टी पदाधिकारी शुक्रवार से ही हरियाणा पहुंचने शुरू हो गए हैं तथा वह शनिवार से अपने-अपने निर्धारित विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार की कमान संभाल लेंगे।
शिअद नेताओं ने 22 हलकों में संभाला मोर्चा
शिअद नेताओं की इनेलो के साथ लंबी मंत्रणा के बाद उन 22 हलकों में पार्टी नेताओं की ड्यूटियां लगाई गई हैं, जहां सिखों की जनसंख्या अधिक है।
मुख्य रूप से यह वे विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां सिख मतदाताओं की संख्या 15000 या इससे अधिक है। इनका चयन विशेषत: एचएसजीएमसी विवाद को लेकर ही किया गया है।
यहां चुनावी सभाओं के दौरान जहां शिअद नेताओं का हमला मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली हरियाणा की कांग्रेस की कारगुजारी पर होगा, वहीं सिखों से पंथ के नाम पर परंपरागत ढंग से भी वोट मांगे जाएंगे।
शिरोमणि अकाली दल का कांग्रेस पर सीधा हमला रहा है कि इसने हमेशा सिखों के आंतरिक मामलों में दखलंदाजी करके उनमें फूट डालने की कोशिश की और एसजीपीसी को कमजोर करने के लिए एचएसजीएमसी का गठन किया गया।
अकाली नेता जहां एचएसजीएमसी के गठन को अपने भाषणों के दौरान एसजीपीसी की सर्वोच्चता को चैलेंज करने वाला कदम करार देंगे, वहीं पहले की तरह ही इसे श्री अकाल तखत पर कांग्रेस का एक और हमला भ्ज्ञी बताएंगे। कुल मिलाकर एचएसजीएमसी मुद्दे पर जबरदस्त घमासान आगामी दस दिनों में हरियाणा के रण में देखने को मिलेगा।
हुड्डा-बादल होंगे आमने-सामने
इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल आमने-सामने होंगे। हुड्डा पहले ही ताबड़तोड़ प्रचार में जुटे हैं, जबकि बादल आगामी 6 अक्तूबर से चुनावी रण में उतरेंगे। इस दौरान दोनों तरफ से जबरदस्त परस्पर विरोधी बयानबाजी देखने को मिलेगी।
ध्यान रहे कि एचएसजीएमसी के रूप में हरियाणा के लिए अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का गठन करवाकर (मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन) हुड्डा ने प्रदेश के सिखों के एक वर्ग को अपने साथ करने में कामयाबी हासिल की है। वहीं, अलग कमेटी के गठन का विरोध कर रहा वर्ग एकदम से उनके खिलाफ खड़ा हो गया है।
ऐसे में सियासी माहिर जहां एचएसजीएमसी के गठन को हुड्डा व कांग्रेस की सिख वोट बैंक में सेंध लगाने की एक सोची समझती रणनीति करार दे रहे हैं।
एचएसजीएमसी पदाधिकारी इस चुनाव में कांग्रेस का समर्थन करने की फैसला ले चुके हैं, तो एसजीपीसी समर्थक सीधे तौर पर इनेलो-शिअद गठबंधन का साथ देंगे। इस प्रकार हरियाणा के रण में सिख वर्ग काफी प्रभावशाली तरीके से अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने जा रहा है।