भाजपा, कांग्रेस और आप को टक्कर देने के लिए मैदान-ए-जंग में एक और राजनीतिक दल उतर गया है। आगे की भी पूरी तैयारी है। ये दल है पंजाब का शिरोमणि अकाली दल, जो धीरे-धीरे राष्ट्रीय पार्टी बनने की कोशिश में आगे बढ़ रहा है।
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव में अपने दम पर 35 उम्मीदवार खड़े करने की घोषणा और पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, असम, बिहार व छत्तीसगढ़ में पार्टी ऑब्जर्वर नियुक्त करना, इसी कड़ी का हिस्सा है।
इन राज्यों में इससे पहले पार्टी की राजनीतिक गतिविधियां न के बराबर रही हैं। यहां शिअद समर्थकों का समर्थन आमतौर पर भाजपा का को मिलता रहा है। इसका कारण पंजाब में दोनों का एक साथ होना माना जाता है।
वहीं, अब पार्टी अपने लेवल पर इन प्रदेशों में सक्रिय होने जा रही है। इसका मुख्य टार्गेट इन राज्यों में बसे सिख हैं। सियासी माहिरों के अनुसार निश्चित रूप से इसका प्रभाव भाजपा के वोट बैंक पर पड़ेगा।
देश भर में पैर पसारने शुरू किए पार्टी ने
बहरहाल, शिअद पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के बाद अन्य राज्यों में अपने पैर पसारने की शुरुआत कर चुकी है। पंजाब में पार्टी की भाजपा के साथ गठबंधन सरकार है। हरियाणा में दल के सांसद और विधायक हैं, जबकि दिल्ली में भी पिछले समय के दौरान विधानसभा चुनाव में पार्टी अच्छा प्रदर्शन कर चुकी है।
इसके साथ ही दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर शिअद काबिज है। हिमाचल और राजस्थान में शिअद पहले ही विधानसभा चुनावों में उम्मीदवार उतारता आया है। अब नए प्रदेशों की ओर पार्टी का रुख भविष्य की राजनीति के कई संकेत दे रहा है। आने वाले समय में इसका प्रभाव पंजाब की सियासत पर भी पड़ने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के बाद अन्य राज्यों पर नजर
‘शिअद की लोकप्रियता देशभर में बढ़ रही है। पंजाब के बाद हरियाणा और दिल्ली में पार्टी को पिछले समय के दौरान मिली सफलता इसका प्रमाण है। उम्मीद है कि आने वाले समय में अन्य राज्यों में भी अच्छे नतीजे सामने आएंगे।’
-सुखबीर सिंह बादल, अध्यक्ष शिअद और उप मुख्यमंत्री पंजाब