शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से कहा कि वे 2017 के संशोधित राज्य कृषि उत्पाद बाजार कमेटी (एपीएमसी) अधिनियम को रद्द करने के लिए तत्काल विशेष विधानसभा का सत्र बुलाएं। सुखबीर ने कहा कि मुख्यमंत्री को किसानों के साथ चलकर उनके विरुद्ध अधिनियम लागू नहीं करना चाहिए था। वे किसानों और पंजाब के खेत मजदूरों को बताएं कि राज्य एपीएमसी अधिनियम 2017 को रद्द करने से इनकार क्यों कर रहे हैं, जिसे मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने अपने ही राज्य में लागू किया है।
सुखबीर बादल ने मुख्यमंत्री से यह भी पूछा कि क्या वह 2019 के कांग्रेस के घोषणा पत्र से खुद को अलग करने का नैतिक साहस दिखा सकते हैं, जिसमें एपीएमसी एक्ट को हटाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से यह भी कहा कि वे मोंटेक सिंह आहलुवालिया समिति की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए कृषि क्षेत्र के निगमीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों से माफी मांगें, जिसमें खाद्यान्न की खरीद को कम करने को कहा गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से कमेटी को अस्वीकार करने को कहा, जिसमें पंजाब के किसानों के लिए डेथ वारंट लिखा गया है। हम तब तक आराम से नहीं बैठेंगे जब तक अन्नदाता को न्याय मिलना सुनिश्चित नहीं हो जाता।
सुखबीर बादल ने कहा कि यह पहला अवसर नहीं है, जब मुख्यमंत्री ने लोगों की पीठ में छुरा घोंपा हो। उन्होंने पहले भी पवित्र श्री गुटका साहिब और दशम पिता के नाम पर झूठे वादे किए हैं। अब भी वे किसानों को धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की भलाई के लिए लड़ाई तब तक जारी रखेंगे जब तक सभी किसान संतुष्ट न हो जाएं कि उनके अधिकार सुरक्षित हैं।