शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि केंद्र सरकार अगर सच में मुस्लिम महिलाओं की हितैषी है तो उसे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सिफारिशों को मान लेना चाहिए था, जिसमें मुस्लिम विद्वान भी चाहते थे कि तीन तलाक की बिद्दत खत्म हो लेकिन घरों को हमेशा के लिए टूटने न दिया जाए।
शाही इमाम ने कहा कि सियासी पार्टी क्या कहती है, यह बाद की बात है। मुसलमानों के बारे में बनाए गए कानून के विषय में मुसलमान क्या कहते हैं यह महत्वपूर्ण है। शाही इमाम ने कहा कि मुसलमानों को अपना जीवन व्यतीत करने के लिए शरीयत ही काफी है। यही वजह है कि देश भर की अदालतों में मुसलमानों से संबंधित तलाक के मुकदमे सबसे कम हैं।
शाही इमाम ने कहा कि निकाह और तलाक के अक्सर मसले मस्जिदों में हल किए जाते हैं और इस बीच अगर कोई असंतुष्ट जोड़ा कानूनी कर्रवाई करता है तो उसे नए बनाए गए कानून से घर बसाने की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।
एक प्रश्न के उत्तर में शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान ने कहा कि मोदी सरकार को चाहिए कि इस बिल की खामियों को दूर कर इसे मुस्लिम महिलाओं के लिए सियासी पैंतरे की बजाए घरों को जोड़ने वाला रास्ता बनाए।