शहीद-ए-आजम भगत सिंह फाउंडेशन, पाकिस्तान ने भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की ‘न्यायिक हत्या’ के लिए ब्रिटेन की महारानी से सार्वजनिक माफी की मांग की है। शहीदों को उनकी 88वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने के लिए लाहौर के शादमान चौक पर फाउंडेशन के अध्यक्ष इम्तियाज राशिद कुरैशी के नेतृत्व में आयोजित एक कार्यक्रम में यह मांग की गई। यह कार्यक्रम शनिवार शाम भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन द्वारा लाहौर के फव्वारा चौक पर आयोजित किया गया था, जहां 23 मार्च 1931 को तीनों स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी गई थी।
उच्च सुरक्षा के बीच आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और दोनों देशों के महान स्वतंत्रता सेनानी शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए मोमबत्तियां जलाईं। फाउंडेशन के चेयरमैन, कुरैशी ने लाहौर से फोन पर बताया कि सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए सभी उपस्थित लोगों ने मांग की कि ब्रिटेन की महारानी को शहादत के स्थान पर आना चाहिए और दोनों देशों (भारत और पाकिस्तान) और शहीदों परिवारों से माफी मांगनी चाहिए। इसके साथ ही स्वतंत्रता सेनानियों और ‘न्यायिक हत्याओं’ के मुआवजे का भुगतान शहीदों के परिवारों को भी किया जाए।
समारोह के मुख्य अतिथि एडवोकेट हाफिजुर्रहमान चौधरी, लाहौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष थे, जबकि सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट राजा जुल्कर नैन, सैयद अलमास अदर काजमी, पंडित भगत लाल खोखर, मोहम्मद इकबाल मुगल, पीरजादा शमशाद हुसैन कादरी, सेठ बशीर अहमद और शाहिद नसीर विशेष अतिथि थे। फाउंडेशन के संरक्षक एडवोकेट अब्दुल रशीद कुरैशी ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भगत और उनके साथियों जैसे लोग सदियों में पैदा होते हैं और उनका महान बलिदान हमेशा याद रहेगा। हम उनके साहस और बलिदान को नहीं भूलेंगे।