मार्च 1998 को नगर काउंसिल के प्रस्ताव नंबर 214 के तहत इस स्मारक का नाम शहीद भगत सिंह चौक रख दिया था। करीब 24 वर्ष बीतने के बावजूद यहां काउंसिल ने शहीद भगत सिंह चौक का एक बोर्ड तक नहीं लगवाया। स्मारक के आसपास रिक्शा, आटो चालक, सब्जी, फास्ट-फूड की रेहड़ियां लगी रहती हैं। नगर काउंसिल की ओर से सफाई कराने की जहमत नहीं उठाई जाती है।
क्लब के सदस्य ही सफाई आदि करते हैं। शहर के इस मुख्य चौक पर आज एक भी लाइट न लगी होने के कारण रात को ये स्मारक अंधेरे में डूब जाता है। चार वर्ष पहले तक यहां मरकरी लाइटें लगी हुई थीं लेकिन खंभा टूटने के बाद यहां अंधेरा छा गया। वालिया ने प्रशासन से यहां हाईमास्ट स्ट्रीट लाइटें लगाने, रेहड़ी-रिक्शा व टेंपो चालकों को हटवाने की मांग की है। साथ ही एक पुलिसकर्मी की तैनाती यहां करने की भी मांग प्रशासन से की है।
शहीदों के विचारों के प्रसार से होगा भारत का निर्माण
संजय वालिया ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सरकारी दफ्तरों में शहीद भगत सिंह व डॉ. अंबेडकर की तस्वीरें लगाने के निर्देश दिए हैं। मगर दफ्तरों में सिर्फ शहीद भगत सिंह की फोटो लगाने से नहीं बल्कि विचारधारा के प्रसार से शहीद भगत सिंह के सपनों के भारत का निर्माण होगा।
युवा पीढ़ी नशा छोड़ अपनाए शहीदों की सोच
युवा पीढ़ी को नशा त्यागकर आज शहीदों की सोच को जीवन में धारण करने की जरूरत है। नशा सिर्फ ड्रग्स, स्मैक, अफीम, शराब आदि का नहीं होता बल्कि सामाजिक बुराइयां भी एक नशा हैं। युवाओं को आज किसी भी बुराई का साथ न देते हुए शहीद भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव के सपनों के भारत के निर्माण में अहम योगदान डालना चाहिए। युवा समाज की रीढ़ की हड्डी हैं। अगर हड्डी ही टूटी होगी तो समाज का ढांचा लड़खड़ा जाएगा। -डॉ. त्रिलोक सिद्धू, वरिष्ठ सदस्य शहीद भगत सिंह क्लब मुक्तसर
विश्वविद्यालयों में भगत सिंह के नाम पर चेयर स्थापित करने की मांग
पंजाब के सभी विश्वविद्यालयों में शहीद-ए-आजम भगत सिंह के नाम पर चेयर स्थापित की जाए। जहां विद्यार्थी भगत सिंह के जीवन संबंधी पूरी विस्तार सहित स्टडी कर जानकारी जुटा सकें ताकि युवाओं में भगत सिंह के फलसफे का प्रसार हो सके। आज समय की जरूरत है कि युवाओं में शहीद भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव की तरह देशभक्ति का जज्बा होना चाहिए। - शिक्षक सुरिंदर कुमार, सदस्य शहीद भगत सिंह क्लब मुक्तसर