पत्रकारों से बातचीत करते एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी।
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डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में बंद ‘वारिस पंजाब दे’ के मुखिया अमृतपाल सिंह और उसके साथियों को जेल में अपना भोजन पकाने की इजाजत दी जानी चाहिए। यह बात शुक्रवार को अमृतसर में एसजीपीसी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कही।
पत्रकारों से बातचीत में धामी ने कहा कि उन्हें मीडिया से जानकारी मिली है कि अमृतपाल और उसके साथियों की जेल में ठीक ढंग से देखभाल नहीं हो रही है और जेल में स्थानीय लोगों की भाषा समझ नहीं आने के चलते भी सिख कैदियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। धामी ने जेल प्रशासन से यह भी अपील की है कि अमृतपाल और उसके साथियों को भाषा अनुवादक उपलब्ध कराया जाए।
धामी ने जेल में सिख कैदियों को दिए जा रहे भोजन में तंबाकू शामिल होने की खबरों में गहरी चिंता जताते हुए यह भी मांग की है कि अमृतपाल और उसके साथियों को जेल में अपना भोजन खुद पकाने की इजाजत दी जाए ताकि सिखों के खाने में तंबाकू जैसी वर्जित वस्तु से बच सके। धामी ने कहा कि एसजीपीसी की तरफ से अमृतपाल और उसके साथियों को पहले ही कानूनी मदद के लिए वकील मुहैया कराया हुआ है, जिसे ताजा घटनाक्रम को लेकर कार्रवाई को कहेंगे।
अमृतपाल और साथियों ने जेल में भूख हड़ताल नहीं कीः डीसी
डिब्रूगढ़ की सेंट्रल जेल में बंद खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह और उसके साथियों द्वारा जेल में भूख-हड़ताल करने की पंजाब के सोशल मीडिया पर जारी चर्चाओं पर विराम लगाते हुए शुक्रवार को डिब्रूगढ़ के डिप्टी कमिश्नर विश्वजीत पैगू ने कहा कि वारिस पंजाब दे के मुखिया अमृतपाल सिंह और उनके साथियों ने डिब्रूगढ़ जेल में भूख हड़ताल नहीं की है। गौरतलब है कि अमृतपाल सिंह की पत्नी किरणदीप कौर ने हाल ही में दावा किया था कि अमृतपाल और साथियों ने जेल में भूख हड़ताल कर दी है।