एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी।
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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के जुर्म में करीब 28 साल के जेल में बंद बलवंत सिंह राजोआना के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बुधवार को दिए गए फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने कहा है कि अब केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह राजोआना की सजा रद करके उसे रिहा करने का एलान करे।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने राजोआना के केस में गृह मंत्राय को फैसला लेने का निर्देश दिया है, इसलिए अब सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। धामी ने कहा कि केंद्र सरकार ने राजोआना की सजा बदलने के बारे में श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर नोटिफिकेशन जारी कर दिया था, जिसे ध्यान में रखते हुए तुरंत फैसला लिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार अपने 2019 के नोटिफिकेशन को लागू करते हुए राजोआना की रिहाई का फैसला ले क्योंकि वह उम्रकैद से ज्यादा सजा भुगत चुके हैं। धामी ने कहा कि भाजपा में शामिल सिख नेताओं को भी राजोआना के मामले में सरकार पर दबाव बनाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि यह समय राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा के लिए भी फर्ज निभाने का है।
शिअद ने राजोआना पर केंद्र के यू-टर्न की निंदा की
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने सिख बंदी बलवंत सिंह राजोआना की रिहाई के मुद्दे पर केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में यू-टर्न लिए जाने की निंदा की है। पार्टी ने केंद्र सरकार की निंदा करते हुए कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर दोहरा मापदंड अपना रही है।
पार्टी की ओर से यह भी कहा गया है कि ऐसा लगता है कि भाजपा और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच रणनीतिक मिलीभगत बंदी सिंह की रिहाई में रोड़ा बन रही है। बिक्रम सिंह मजीठिया ने राजोआना की दया याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गृह मंत्रालय को निर्देश दिए जाने पर कहा कि केंद्र सरकार ने सिख समुदाय की भावनाओं को आहत किया है। इससे पहले 2019 में श्री गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती पर राजोआना की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने के बाद 2012 में सरकार राजोआना की सजा माफी की याचिका पर फैसला लेने से मुकर गई। उन्होंने कहा कि इससे दुनिया भर में नानक नाम लेवा संगत को गहरी पीड़ा हुई है।