धामी ने कहा कि गुरबाणी प्रसारण का मामला पूरी तरह प्रबंधकीय है, जिसे आम आदमी पार्टी अपने सियासी हितों के लिए इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवंत मान सरकार का मकसद एसजीपीसी को कमजोर करना है लेकिन सिख कौम ऐसा नहीं होने देगी। सरकार ने गुरुद्वारा एक्ट में संशोधन के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर भी सरकार के दो पैरामीटर हैं, एक डीजीपी की नियुक्ति अपने अधीन लाने के लिए और दूसरे एसजीसीपी के लिए।
इसलिए नहीं हो सके एसजीपीसी के चुनावः धामी
एसजीपीसी के 11 साल से चुनाव नहीं होने के सवाल पर धामी ने कहा कि एसजीपीसी का 2011 में चुनाव हुआ था लेकिन उसके बाद सहजधारी सिखों के मामले में 2016 तक एसजीपीसी पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में व्यस्त रही और 2016 से 2023 तक न तो चुनाव कराए गए और न ही बजट ही पेश हो सका।
पीटीसी से मिलते हैं दो करोड़ सालाना
श्री हरमंदिर साहिब से पवित्र गुरबाणी के एक चैनल के जरिये प्रसारण के मामले में एडवोकेट धामी ने स्पष्ट किया कि एसजीपीसी को पीटीसी चैनल से दो करोड़ रुपये सालाना मिलते हैं। इसका उपयोग एसजीपीसी द्वारा चलाए जा रहे शैक्षिक संस्थानों और अस्पतालों में किया जाता है। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी द्वारा प्रसारण के लिए पैसा लिया जाता रहा है लेकिन दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और हेमकुंड साहिब संबंधी बोर्ड गुरबाणी के प्रसारण के लिए चैनलों को पैसा देते हैं। धामी ने पीटीसी चैनल का पक्ष लिए जाने के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि पीटीसी से पहले तीन अन्य चैनल भी गुरबाणी प्रसारण के लिए आगे आए थे लेकिन तकनीकी स्तर पर सक्षम नहीं हो पाने के चलते वह चैनल पीछे हट गए।
गुरुघरों में घुसपैठ करना चाहती है सरकारः धामी
एसजीपीसी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि गुरुद्वारा एक्ट में संशोधन के जरिये भगवंत मान सरकार गुरुघरों में घुसपैठ का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आज एक संशोधन किया है, कल और संशोधन किए जाएंगे और गुरुघरों के कामकाज में सरकार का सीधा दखल बढ़ जाएगा। यह एक सैद्धांतिक लड़ाई है और उन्हें आशंका है कि सरकार विभिन्न मुद्दों को उठाकर एसजीपीसी के काम में दखल दे सकती है।