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निर्दयताः ओह! कितना तड़पे होंगे बेजुबान, 22 बंदरों को 11 बोरों में बंद कर फेंका, सात की मौत

Sat, 06 Jul 2019 04:25 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महेंद्रगढ़ (हरियाणा)
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सांकेतिक तस्वीर
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महेंद्रगढ़ के गांव झगड़ौली में नहर किनारे सुबह 11 बोरों में 22 बंदर बंद मिले। गांव के युवकों ने जब बोरों को खोला तो 14 बंदर भाग गए लेकिन सात मृत पाए गए। एक बेहोश मिला। बेहोश बंदर को उपचार के बाद गोशाला में भेज दिया गया।

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वहीं, मृत बंदरों का पोस्टमार्टम कराया गया तो पता चला उनकी मौत अधिक गर्मी में दम घुटने से हुई है। महेंद्रगढ़ वन्य प्राणी विभाग के निरीक्षक बाबूलाल का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। इसके बाद शिकायत दर्ज कराई जाएगी। उच्च अधिकारियों को प्राथमिक रिपोर्ट भेज दी है।

जानकारी के अनुसार, गांव झगड़ौली के कई युवक पुलिस में भर्ती होने के लिए नहर के किनारे सुबह दौड़ लगाने जाते हैं। शुक्रवार सुबह करीब चार बजे जब युवा दौड़ लगाने नहर पर पहुंचे तो उन्हें कनीना-महेंद्रगढ़ मार्ग स्थित नहर के पास कुछ बोरे दिखाई दिए। जब युवाओं ने बंद बोरों को खोला तो उनमें से बंदर निकले। इसके बाद पुलिस को सूचित किया गया। 

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पुलिस की टीम ने घटनास्थल की जांच की और वन्य प्राणी विभाग के अधिकारियों को बुलाया। वन्य प्राणी विभाग के इंस्पेक्टर बाबूलाल, जिला वन अधिकारी राजेश कुमार सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। इस समय पर तक बोरों में आठ बंदर थे। इनकी जांच की तो पांच बड़े और दो छोटे बंदरों की मौत हो चुकी थी।

एक बंदर बेहोशी की अवस्था में था। उसे पशु चिकित्सक ने इंजेक्शन दिया, जिसके बाद बंदर को होश आ गया। गांव के लोगों ने बताया कि बंदरों को बोरों में बंद करके रात 12 बजे के बाद फेंका गया होगा। इस रास्ते पर रात 12 बजे तक लोगों का आवागमन रहता है। 

हमारे पास पांच बड़े तथा दो छोटे बंदर लाए गए थे। इन बंदरों का पोस्टमार्टम किया गया, जिसमें पाया गया कि बंदरों की मौत अधिक गर्मी में बोरे में बंद रहने के कारण दम घुटने से हुई है। किसी भी बंदर को जहरीला पदार्थ नहीं दिया गया। - ईशान गोयल ,पशु चिकित्सक, मेघनवास, महेंद्रगढ़।
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