पुलिस की टीम ने घटनास्थल की जांच की और वन्य प्राणी विभाग के अधिकारियों को बुलाया। वन्य प्राणी विभाग के इंस्पेक्टर बाबूलाल, जिला वन अधिकारी राजेश कुमार सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। इस समय पर तक बोरों में आठ बंदर थे। इनकी जांच की तो पांच बड़े और दो छोटे बंदरों की मौत हो चुकी थी।
एक बंदर बेहोशी की अवस्था में था। उसे पशु चिकित्सक ने इंजेक्शन दिया, जिसके बाद बंदर को होश आ गया। गांव के लोगों ने बताया कि बंदरों को बोरों में बंद करके रात 12 बजे के बाद फेंका गया होगा। इस रास्ते पर रात 12 बजे तक लोगों का आवागमन रहता है।
हमारे पास पांच बड़े तथा दो छोटे बंदर लाए गए थे। इन बंदरों का पोस्टमार्टम किया गया, जिसमें पाया गया कि बंदरों की मौत अधिक गर्मी में बोरे में बंद रहने के कारण दम घुटने से हुई है। किसी भी बंदर को जहरीला पदार्थ नहीं दिया गया। - ईशान गोयल ,पशु चिकित्सक, मेघनवास, महेंद्रगढ़।