रात में करोड़ों का सामान जलने का अनुमान
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फायर सब ऑफिसर जगदीश सिंह, फायरमैन संजीव शर्मा समेत अन्य फायरकर्मी आग बुझाने के लिए कड़ी मशक्कत करते रहे। वहीं ईस्ट डीएसपी दिलशेर सिंह चंदेल, क्राइम ब्रांच डीएसपी सुखराज कटेवा, थाना प्रभारी जसबीर सिंह मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लिया। खबर लिखे जाने तक देर रात तक आग पूरी तरह से नहीं बुझी तो जेसीबी से शॉप की छत तोड़कर आग पर काबू पाने की कोशिश की जा रही थी।
मालिक की जुबानी
मालिक रमेश अग्रवाल ने बताया कि रोजाना की तरह रात करीब आठ बजे शॉप को बंद कर घर चले गए थे। फोन पर सूचना मिली कि उनके फैक्ट्री में आग लगी है। फौरन वह फैक्ट्री पहुंचे। वहां पर आग काफी भड़की हुई थी। आग फैक्ट्री में रखे मिठाइयों के डिब्बे से शुरू हुई है। गत्ते की वजह से आग ने विकराल रूप ले लिया। आग में कितना नुकसान हुआ है इसके बारे में कुछ बता नहीं सकता। आग काबू होने पर ही सारी स्थिति साफ हो सकेगी।
50 मीटर की दूरी पर पॉवर ग्रिड
घटना वाली जगह से महज 50 मीटर की दूरी पर पावरग्रिड था। यहां से लाइट पूरे एरिया में सप्लाई होता है। आनन फानन में एरिया की लाइट कनेक्शन काट दिया गया। बिजली की हाईवोल्टेज तार भी फैक्ट्री के ऊपर से गुजरी हुई थी। ऐसे में अगर आग पावरग्रिड तक पहुंचती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
आग इतनी भयंकर थी कि फैक्ट्री में रखे सभी सामानों को अपने चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग लगते ही फैक्ट्री में कई जोरदार धमाके हुए। बताया गया कि धमाका सिलिंडर के फटने या फिर अंदर रखे ज्वलनशील पदार्थ से हुआ हो सकता है। लेकिन यह अभी तक साफ नहीं हो सका है कि इतने धमाके हुए और किस वजह से हुए।
फायर सब ऑफिसर जख्मी
आग इतनी बेकाबू थी कि उसमें से लपटें बाहर निकल रही थी। इस दौरान फायर सब ऑफिसर जगदीश सिंह आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे। तभी वह इसकी चपेट में आ गए और गंभीर घायल हो गए। उनके पैर व अन्य जगहों पर चोटें आई। पुलिस पीसीआर की मदद से उन्हें पीजीआई में भर्ती करवाया गया। जहां उनका इलाज चल रहा है।