कृषि कानूनों के विरोध में सोमवार को प्रदेश कांग्रेस ने सिंघु बॉर्डर की तर्ज पर पंजाब-हरियाणा सीमा पर स्थित शंभू बॉर्डर का घेराव किया। इस दौरान पंजाब कांग्रेस ने विशाल धरना दिया। सड़क पर सात किमी लंबा और लगभग छह घंटे जाम लगा रहा। धरने में करीब तीन हजार वाहन और दस हजार से ज्यादा लोगों ने भाग लिया। इतना ही नहीं सुबह के वक्त हरियाणा पुलिस ने पंजाब की सीमा सील कर दी। जिसके चलते पंजाब-हरियाणा सीमा पर फंसे हजारों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सेना के वाहन भी जाम में काफी समय तक फंसे रहे। बॉर्डर पर लगे जाम से आम जनता के साथ महिलाओं, बुजुर्गों व बच्चों को भूखे प्यासे रहना पड़ा। हालांकि कांग्रेस ने धरने में लंगर व पानी की व्यवस्था की थी लेकिन हजारों वाहनों के जमा होने के कारण उन्हें सड़कों पर इंतजार करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
पैदल जाने को यात्री हुए मजबूर।
इतना ही नहीं जाम के कारण जरूरी कार्य से जा रहे यात्रियों को कई किलोमीटर पैदल चलकर बैरिकेड पार कर पंजाब-हरियाणा की सीमा में प्रवेश करना पड़ा। सुबह 10 बजे लगे वाहनों के जाम के बाद करीब चार बजे राष्ट्रीय राजमार्ग वाहनों से पूरी तरह खाली हुआ। पंजाब पुलिस ने हरियाणा की तरफ जाने वाले वाहनों को डायवर्ट कर उन्हें गांवों के रास्ते से निकाला, इसके बावजूद भी करीब सात किलोमीटर लंबी लाइन लगी रही।
यात्री हुए परेशान
ग्वालियर से मलेरकोटला जा रहे अरविंद ने बताया कि जरूरी कार्य से उन्हें जाना पड़ रहा है। वह जिस बस से अंबाला तक आए हैं, उस बस वाले ने आगे जाने के लिए मना कर दिया। वह परिवार को लेकर पैदल चलने को मजबूर हो रहा है। वहीं अपनी माता के साथ करनाल से राजपुरा आ रहे प्रिंस ने बताया कि उन्हें जरूरी कार्य से राजपुरा आना था लेकिन पैदल चलकर उनकी हालात खराब हो गई है।
नारायणगढ़ से घनौर के गांव उलाणा अपने दो बच्चों के साथ जा रही कुलविंद्र कौर ने कहा कि पार्टियों को प्रदर्शन करना चाहिए लेकिन सड़कों पर जाम नहीं लगाना चाहिए। वह सामान के साथ भूखे प्यासे बच्चों को लेकर मुश्किल से चल रही हैं।