कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण के फैलाव का आकलन कर तीसरी लहर की तैयारी के लिए चंडीगढ़ में अगले हफ्ते से सीरो सर्वे शुरू हो रहा है। प्रशासन ने इसके लिए पीजीआई और जीएमसीएच-32 को जिम्मेदारी सौंपी है। प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा का कहना है कि दोनों अस्पताल अगले कुछ दिनों में बैठक कर रणनीति तय करेंगे। इसके बाद सर्वे शुरू होगा। सर्वे में जो नतीजे आएंगे, उसके हिसाब से अगली रणनीति तय होगी।
इस सर्वे के नतीजे के आधार पर संक्रमण का फैलाव पता चलता है। इस सामुदायिक सर्वे के नतीजे के अध्ययन के आधार पर प्रशासन भविष्य में इस महामारी की रोकथाम के लिए कार्ययोजना बनाएगा। जानकारी के अनुसार, पीजीआई और जीएमसीएच-32 शहर के इलाकों को बांटकर सर्वे शुरू करेंगे। इसमें शहर के विभिन्न हिस्सों से लोगों के रक्त के नमूने लेकर एंटीबॉडीज की जांच की जाएगी। इनमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल होंगे।
सीरो सर्वे के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि अब तक शहर की कितनी आबादी महामारी के इस दौर में कोरोना से संक्रमित हो चुकी है। शहर में फिलहाल 12 से 13 लाख की आबादी है। जीएमसीएच-32 के अधिकारियों के अनुसार अभी तक पीजीआई के साथ कोई बैठक नहीं हुई है। हालांकि अगले कुछ दिनों में बैठक होने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य सचिव अरुण कुमार गुप्ता ने बताया कि पीजीआई और जीएमसीएच-32 को सीरो सर्वे करने का काम सौंपा गया है। आपसी सहयोग से दोनों अस्पतालों के प्रशासन अपनी-अपनी ड्यूटी तय कर लेंगे, ताकि किसी तरह की कोई असमंजस न हो। इसके जरिए शहर में कोरोना के ट्रेंड के बारे में पता चल पाएगा। सर्वे कितनी देर में होगा पर अरुण गुप्ता ने कहा कि इसका फैसला दोनों अस्पताल प्रशासन मिलकर करेंगे।
संक्रमित होने वाले कई ऐसे भी, जिन्हें नहीं पड़ी दवा की जरूरत
प्रशासन का स्वास्थ्य विभाग आगे इसी के आधार पर शहर में बीमारी पर काबू पाने के लिए अपनी रणनीति तैयार करेगा। प्रशासन को लगता है कि शहर में अब तक जितने भी कुल संक्रमण के केस आए हैं, उससे कहीं ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। इसके पीछे का कारण बताते हुए अधिकारियों का कहना है कि बहुत से लोगों को संक्रमण हुआ, लेकिन वह घर पर ही ठीक हो गए। उन्होंने इसकी सूचना कहीं पर नहीं दी। इसी तरह बहुत से लोगों में कोरोना की बीमारी बिना लक्षणों के रही लेकिन ये लोग अपने आप ही ठीक हो गए। इसे सीरोलॉजी टेस्ट भी कहा जाता है।
व्यक्तिगत लोगों के ग्रुप का ब्लड सीरम लेकर इसकी जांच होती है। इसमें देखा जाता है कि कितने लोगों में एंटीबॉडी बनी है और उनके शरीर के इम्यून सिस्टम ने एंटीबॉडी बनाकर कैसे बीमारी के प्रति रिस्पांड किया है। पीजीआई के वरिष्ठ डाक्टरों के मुताबिक एक स्वस्थ शरीर में दो तरह की एंटीबॉडी बनती हैं। एक इम्यूनोग्लोबिन एम और दूसरी इम्यूनोग्लोबिन जी, जो किसी भी संक्रमण के खिलाफ काम करती हैं। बीमारी से ठीक हुए लोगों में यह काफी देर तक रहती हैं।