चंडीगढ़ के सेक्टर 32 स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के 6वें तल पर स्थित ओवरफ्लो वार्ड में सामान्य मरीजों के बीच ही टीबी के गंभीर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। डायरिया, बुखार, पेट दर्द के मरीजों के बीच भर्ती फेफड़े के टीबी के मरीज खांस रहे हैं। इससे सामान्य मरीज व उनके परिजन चिंतित हैं। उन्हें चिंता है कि कहीं मर्ज का इलाज कराते कराते उनके अपनों को टीबी न हो जाए। उधर, अस्पताल प्रशासन इससे बेखबर है।
एक तरफ अस्पताल प्रशासन मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण बेड की कमी होने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल में ही प्राइवेट वार्ड में ताला बंद है। ओवरफ्लो में भर्ती मरीजों व उनके परिजनों का कहना है कि डेंगू और कोविड के दौरान उन प्राइवेट वार्डों को खोला जा सकता है लेकिन टीबी के मरीजों को वहां भर्ती नहीं किया जा सकता। अस्पताल की यह व्यवस्था अजीब है। सामान्य मरीजों को टीबी बांटने का काम खुलेआम किया जा रहा है। मरीज इलाज के डर से इसकी शिकायत भी नहीं कर पा रहा।
जीएमसीएच 32 में इलाज के मानकों की अनदेखी इससे पहले भी हो चुकी है। कुछ महीने पहले अस्पताल के कॉर्डियक वार्ड के मरीजों के बीच मानसिक रोग के मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा था। इससे कॉर्डियक के मरीज व उनके परिजन भयभीत थे। इस समस्या को भी अमर उजाला ने 19 सितंबर 2021 के अंक में वाह रे व्यवस्था, मनोरोगियों के साथ ही सामान्य मरीजों का कर रहे इलाज, शीर्षक के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
टीबी के मरीजों के लिए अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड है लेकिन वहां अभी भवन निर्माण कार्य चल रहा है। जहां तक टीबी और सामान्य मरीजों को एक साथ न रखने की बात है तो अब ऐसा मानक नहीं है। सिर्फ ओपन टीबी (पल्मोनरी टीबी) वाले मरीजों को अलग रखना जरूरी होता है। अन्य प्रकार की टीबी से संक्रमण का खतरा नहीं होता है। -डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच 32