अब तक यही कहा जा रहा था कि पंजाब के युवा ही नशे के जाल में फंस रहे हैं, लेकिन इंडियन साइक्रेटिक सोसाइटी (पंजाब-चंडीगढ़ ब्रांच) ने पंजाब व चंडीगढ़ के लिए जो खुलासा किया, वह चौंकाने वाला है।
सोसाइटी का दावा है कि पंजाब में नशा करने वालों में 10-15 प्रतिशत सीनियर सिटीजन शामिल हैं। इनकी उम्र 60 से 80 साल तक है। सोसाइटी के अधिकारी एवं सेक्टर-35 में साइक्रेटिक क्लीनिक चलाने वाले डॉ. प्रमोद ने बताया कि उनके पास 104 वर्ष के एक सीनियर सिटीजन नशा मुक्ति के लिए आए थे।
इस उम्र में ऐसे लोग काफी परेशान होते हैं और कई दूसरी दिक्कतों की गिरफ्त में आ जाते हैं। जब उनसे चंडीगढ़ के मरीजों की संख्या के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि इसकी एक तिहाई संख्या यहां के लोगों की है। सीनियर सिटीजन अफीम व केमिकल ड्रग्स का ही इस्तेमाल करते हैं और कुछ अल्कोहल एडिक्शन के भी मरीज होते हैं।
उम्र बढ़ते ही नींद की कमी और तनाव की दिक्कत
सोसाइटी का दावा है कि बढ़ती उम्र के साथ तनाव व नींद की दिक्कत शुरू हो जाती है। ऐसे में कुछ सीनियर सिटीजन एल्पराजोलेम व लोराजेपैम (तनाव दूर करने की दवा) लेने लगते हैं। जब कोई व्यक्ति यह दवा लेता है तो धीरे-धीरे इसकी खुराक बढ़ने लगती है।
कई केसों में तो ऐसा देखा गया है कि एक मरीज एक दिन में चार से पांच बार डोज लेते हैं और वे एडिक्शन का शिकार हो जाते हैं। जो लोग शुरू से ही अफीम ले रहे होते हैं। यदि वे बीच में नहीं छोड़ते हैं तो यह सिलसिला काफी उम्र तक जारी रहती है।