फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिग स्क्रीन पर लाइव होगी 6 बेटियों के पिता की कहानी

Sun, 12 Apr 2015 02:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
विज्ञापन
विज्ञापन
बेटा हो तो ऐसा! यह वाक्य बहुतों से सुना होगा। इस पर इतराते हुए भी कई मां-बाप को देखा होगा, लेकिन बेटियों को काबिल बनाने वाले पिता और उनकी लाडलियों की एक ऐसी कहानी जल्द ही रुपहले पर्दे पर दिखाई देगी, जिसमें उनके संघर्षों का जीवंत चित्रण होगा।
विज्ञापन


फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) पुणे में अभिनय विभाग के संस्थापक एवं अभिनय गुरु प्रो. रोशन तनेजा ने जब चुनौतियों की भट्ठी में तपकर सोना बनने वाली बेटियों पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाने की योजना बनाई तो उसका एक पड़ाव भदाना गांव के मास्टर जगदेव सिंह के यहां पर जाकर पूरा हुआ।

शनिवार को प्रो. तनेजा मास्टर जगदेव सिंह यहां पहुंचे और फिल्म की स्क्रिप्ट को लेकर उनकी कहानी जानी। मास्टर जगदेव सिंह की लड़कियों ने उच्चतर शिक्षा हासिल कर अपना और परिवार का नाम रोशन किया है। उनकी सभी लड़कियों ने सफलता के वह प्रतिमान स्थापित किए हैं जहां पर कोई भी पिता इतरा सकता है।
विज्ञापन


उनकी एक बेटी जीवीएम में फिजिक्स की प्राध्यापिका डॉ. संगीता सिंह के रूप में कार्यरत हैं। प्रो. तनेजा ने मास्टर जगदेव सिंह और उनके परिवार का साक्षात्कार करने उपरांत जीवीएम का दौरा किया। यहां उन्होंने प्राध्यापिका डॉ. संगीता सिंह सहित प्राचार्या डा. ज्योति जुनेजा व अन्य लोगों से मुलाकात की।

छह बेटियां जगदेव की, पांच पीएचडी

मास्टर जगदेव सिंह की छह बेटियां और एक बेटा है। इतना बड़ा परिवार होते हुए भी उन्होंने अपनी सभी बेटियों को उच्च शिक्षा के अवसर मुहैया कराए। उनकी पांच बेटियां तो पीएचडी हैं, जबकि एक बेटी पीएचडी कर रही है। सबसे बड़ी बेटी डॉ. संगीता सिंह फिजिक्स में पीएचडी हैं और जीवीएम कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।

इसके बाद डॉ. मोनिका दहिया बायोटेक्नोलॉजी में पीएचडी हैं और फिलहाल टोरेंटो यूनिवर्सिटी में कैंसर पर शोध कर रही हैं। तीसरे नंबर की डॉ. नीतू दहिया ने बायोटेक्नोलॉजी में पीएचडी की है और अमेरिका स्थित एक यूनिवर्सिटी में शोध कर रही हैं। चौथी बेटी डॉ. कल्पना दहिया गणित में पीएचडी हैं और फिलहाल पंजाब यूनिवर्सिटी, पटियाला में अध्यापन का कार्य कर रही हैं।

पांचवीं बेटी डॉ. डेजी दहिया आईआईटी बॉम्बे से मैथेमेटिक्स में पीएचडी की है और फिलहाल एप्लाइड मैथेमेटिक्स पर रिसर्च कर रही हैं। सबसे छोटी बेटी रुची दहिया भी मैथेमेटिक्स में पीएचडी कर रही हैं। जगदेव सिंह के बेटे योगेश बीकॉम, एमबीए हैं और फिलहाल गुड़गांव एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं।
विज्ञापन

2007 से थी मिलने की कोशिश

प्रो. रोशन तनेजा ने बताया कि वे वर्ष 2007 से ही जगदेव सिंह और उनके परिवार से मिलना चाह रहे थे। बकौल तनेजा उस समय जगदेव सिंह की स्टोरी को एक समाचार पत्र में पढ़ा था। इसी के बाद से उनसे मिलने की इच्छा थी। लेख से पता लगा था कि उनकी एक बेटी डेजी दहिया आईटीआई बॉम्बे में पढ़ रही है। इस पर रोशन ने डेजी से संपर्क साधा। हालांकि जगदेव सिंह और उनके परिवार से तनेजा की मुलाकात 8 साल बाद संभव हो पाई।

दिखाना चाहते हैं समस्या
प्रो. तनेजा ने बताया कि वे चाहते हैं कि लोग देखें कि किस प्रकार जगदेव सिंह ने अपनी 6 बेटियों को पढ़ाया और काबिल बनाया।  आज समाज में वे अपना अहम स्थान रखती हैं। जगदेव सिंह को किस तरह की समस्याएं आई होंगी, 10-12 साल पहले भी उन्होंने अपनी बेटियों को इतनी आजादी दी कि वे कहीं से भी पढ़ाई कर लें। हालांकि डॉक्यूमेंटरी की शूटिंग जगदेव सिंह और परिवार द्वारा विदेश यात्रा के कारण 6-7 माह बाद ही हो पाएगी।

बेटियां हैं, लेकिन नहीं किया घर का काम
सबसे बड़ी बेटी संगीता सिंह ने बताया कि वे छह बहनें थी। इतना बड़ा परिवार था, लेकिन कभी भी उनमें से किसी भी बहन ने घर पर काम नहीं किया। वे हमेशा स्कूल में भी अच्छी तरह से ड्रेस पहनकर जाती थी। इन सबके पीछे संगीता ने अपनी माता ओमवती की मेहनत को वजह बताया। संगीता के अनुसार उनकी मां के कारण उन्हें घर पर कभी कोई काम नहीं करना पड़ा, इसी वजह से वे पढ़ाई में पूरा ध्यान लगा पाई।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें