डॉक्टर अभिनंदया ने बताया कि ड्यूटी के दौरान उनसे कुछ ही महीने पहले आए सीनियर उन्हें तरह-तरह से परेशान करते हैं। यह रैगिंग जैसा है। विभाग की तरफ से बनाए गए रोस्टर को लागू नहीं किया जाता। सीनियर मनमानी करते हुए टिशू पेपर पर और व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज डालकर ड्यूटी तय कर देते हैं। कई बार शारीरिक परेशानी के बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती। डबल से भी ज्यादा काम एक शिफ्ट में करना पड़ता है।
ड्यूटी के दौरान शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। इस संबंध में कई बार प्रमुख को सूचित भी किया। उन्होंने अपने स्तर पर हर संभव मदद करने की कोशिश की, लेकिन वह हर समय मददगार नहीं बन सकते। मनमानी ड्यूटी लगाए जाने पर मेरे द्वारा विरोध करने पर सभी मेरे खिलाफ हो गए। मुझे हर तरह से परेशान करने की कोशिश की जाने लगी, जिसके कारण मैंने अंत में इस्तीफा देना ही उचित समझा।
जांच के नाम पर पीड़ित को किया जाता है गुमराह
उधर, सीनियर द्वारा प्रताड़ित होकर अप्रैल 2021 में पीजीआई से इस्तीफा देने वाले न्यूरो सर्जरी विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉ. संदीप यादव का कहना है कि जांच के नाम पर कमेटी सिर्फ पीड़ित को गुमराह करने का काम करती है। उनके मामले में जांच कमेटी ने उन्हें कुछ लोगों के ही बयान भेजकर जांच को पूरा करार दे दिया जबकि सीनियर के गलत व्यवहार के कारण उनको अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी। संदीप का कहना है कि पीजीआई में रेजिडेंट डॉक्टरों से सीनियर 20-20 घंटे काम करवाते हैं। एक डॉक्टर की बजाय उनके साथ सफाई कर्मचारी जैसा व्यवहार किया जाता है। इस संबंध में शिकायत करने पर पीड़ित को ही दोषी ठहराया जाता है। संदीप ने बताया कि वह पीजीआई में पढ़ने के लिए दूसरे संस्थानों को छोड़कर आए थे, लेकिन सीनियर ने उन्हें पीजीआई में रहने नहीं दिया।
सीनियर रेजिडेंट के इस्तीफे और सीनियर डॉक्टर के खिलाफ दी गई शिकायत मेरे संज्ञान में है। मामले की जांच के लिए कमेटी बना दी गई है। सीनियर पर लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं। मामले की बारीकी से जांच कराई जाएगी। -प्रो. जगतराम, निदेशक, पीजीआई चंडीगढ़