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आत्म संयम, नैतिकता और चरित्र बल ही सच्चा धन : रसिक महाराज

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चंडीगढ़। आत्म संयम ही वह आधारशिला है, जिस पर एक सुदृढ़, नैतिक और संतुलित समाज की रचना संभव है। संयम व्यक्ति ही आंतरिक बल, विवेक और प्रज्ञा को जागृत करता है। इससे उसका जीवन निरंतर पवित्रता और श्रेष्ठता की दिशा में आगे बढ़ता है। यह प्रवचन सेक्टर 40 के श्री राधा कृष्ण मंदिर में शिव शक्ति कथा के दौरान नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने दिया।
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उन्होंने कहा कि आत्म-संयम केवल बाह्य आचरण का नियंत्रण नहीं, बल्कि यह अंत:करण में स्थित समस्त विकारों एवं दुर्बलताओं का निराकरण है। प्रत्येक सदाचारी एवं संयमी व्यक्ति अपने आचरण से समाज को प्रेरणा देता है जिससे सामाजिक जीवन में आपसी सहयोग, सम्मान और सद्भाव का वातावरण निर्मित होता है।इस मौके पर मंदिर सभा और हिंदू पर्व महासभा के चंडीगढ़ के प्रधान बीपी अरोड़ा, महासचिव विनय कपूर, आचार्य संचित बिजल्वाण, साध्वी मां देवेश्वरी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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