सहजधारी सिखों के मताधिकार को खत्म करने के लिए सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 में किए गए संशोधन को रद्द करने की अपील की गई है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) चुनाव में वोटिंग के हक को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि इस संशोधन के चलते 70 लाख सहजधारियों को मताधिकार से वंचित कर दिया गया है, जो गलत है।
याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार सहित पंजाब सरकार व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। सहजधारी सिख पार्टी की ओर से उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष परमजीत सिंह राणु ने जनहित याचिका दायर कर बताया कि 1925 में सिख गुरुद्वारा एक्ट बनाया गया था। 1944 में सिख धर्म में आस्था रखने वालों की संख्या पर गौर करते हुए इस एक्ट में संशोधन कर इसमें सहजधारी सिख शब्द को शामिल कर लिया गया और उन्हें भी एसजीपीसी के बोर्ड और कमेटी के चुनाव में मताधिकार दे दिया गया।
2003 में राजनीतिक कारणों के चलते और बिना किसी प्रक्रिया का पालन किए ही एक्ट में से सहजधारी शब्द को अलग करते हुए नोटिफिकेशन जारी कर सहजधारी सिखों को एसजीपीसी के बोर्ड और कमेटी के लिए होने वाले चुनाव में मताधिकार से वंचित कर दिया गया। इसके खिलाफ याचिका दाखिल कर सहजधारी सिखों को मताधिकार से वंचित करने को चुनौती दी गई।