पंजाब के धान बीज घोटाले को लेकर एक नया मोड़ आ गया है। इस बीज घपले में गिरफ्तार किए गए पहले आरोपी बराड़ सीड्स ने पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू) के लाडोवाल सीड्स फॉर्म से चार क्विंटल पीआर-128 का बीज खरीदा था। बीज खरीदने के पांच बिल भी जारी किए गए है।
खास बात यह है कि जिस बीज की वैरायटी को बेचने का अधिकार पीएयू ने नहीं दिया, उसे बराड़ सीड्स को कैसे बेचा गया। इस मामले पर पीएयू का कोई भी अधिकारी कुछ कहने के लिए तैयार नहीं है। उनका सिर्फ इतना कहना है कि जिसने बीज खरीदा है, वह बताए कि आखिरकार बीज कैसे खरीदा।
चीफ एग्रीकल्चर अफसर लुधियाना डॉक्टर नरिंदर पाल सिंह वैनीपाल ने बताया कि बीज घपले में गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी बराड़ सीड्स लुधियाना के मालिक से पांच बिल बरामद हुए है। यह बिल चार मई 2020 के हैं, इन बिल में बराड़ सीड्स की तरफ से पीएयू के लाडोवाल सीड्स फॉर्म हाउस से चार क्विंटल बीज खरीदा दिखाया गया है।
इसमें प्रति किलो 70 रुपये के हिसाब से बिल में बेचा दिखाया गया है। इन बिल को आरोपी के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर में भी दिखाया गया है। इस नए खुलासे के बाद शक की सुई पीएयू की तरफ से जाने लगी है। आखिरकार जो बीज आम किसानों तक नहीं पहुंचा, उस बीज को कैसे पीएयू ने बराड़ सीड्स को बेच दिया।
हालांकि बिलों की सत्यता अभी जांच का विषय है। अगर यह सच निकला तो इसमें पीएयू के कुछ अफसर लपेटे में आ सकते है। यहां बता दे कि बराड़ सीड्स का मालिक हरविंदर सिंह उर्फ काका है, जिसके पिता पहले पीएयू में डॉयरेक्टर सीड्स के पद पर तैनात रह चुके है।
मामले में पीएयू डॉयरेक्टर सीड्स तरसेम ढिल्लों से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि वह इस बारे में कुछ नहीं बता सकते है। जिसने बीज खरीदने के बिल पेश किए है, वहीं बताएगा कि आखिरकार बीज कैसे खरीदे।