हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) की जमीन का एक गुप्त राज 25 साल बाद कागजों से बाहर आया। जमीन दो बार बिक गई, मगर इसका किसी को पता ही नहीं चला।
अब 25 साल बाद जाकर इस्टेट अधिकारी की संजीदगी से यह भेद खुला तो पंचकूला के इंडिस्ट्रयल एरिया फेज-2 स्थित प्लॉट नंबर नौ को सील किया गया।
इस प्लॉट का अलॉटमेंट अजय शर्मा के नाम पर किया गया था। अजय शर्मा ने हुडा को इस प्लॉट के लिए निर्धारित राशि जमा करवाए बगैर ही इस प्लॉट को गुपचुप ढंग से बेच डाला।
अजय शर्मा ने जिसे यह प्लॉट बेचा उसने इसे आगे चार लोगों को किराए पर दे दिया। हुडा के इस्टेट कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस प्लॉट का अलॉटमेंट 1990 में अजय शर्मा के नाम पर किया गया था।
यह अलॉटमेंट प्रॉविजनल था। उस समय अजय शर्मा को जारी किए गए इस लेटर में स्पष्ट लिखा गया था कि जब तक फाइनल अलॉटमेंट नहीं की जाती, तब तक उनका कोई कानूनी अधिकार इस जमीन पर नहीं होगा।
एग्रीमेंट के अनुसार अजय शर्मा को पच्चीस फीसदी रुपये अलॉटमेंट के समय और 75 फीसदी राशि छह वार्षिक किश्तों में जमा करवानी थी।
एक हजार स्क्वायर मीटर के इस प्लॉट की कुल पेमेंट 4.83 लाख रुपये होनी थी, जो अजय शर्मा ने अदा नहीं की। इसीलिए अजय शर्मा को रेगुलर अलॉटमेंट भी नहीं जारी की गई।
अजय शर्मा ने पहले इस प्लॉट को सुरेंद्र अग्रवाल को सेल किया और 1994 में सुरेंद्र अग्रवाल की मौत के बाद वर्ष 1995 में यह प्लॉट जीपीए पर ललित मोहन को बेच दिया।
ललित मोहन ने इस प्लॉट को जसविंदर सिंह, सुशील कुमार पुंडीर, बलविंदर कुमार और विष्णु दत्त और विजय भारद्वाज को किराए पर दे दिया। ललित मोहन ने इन सभी से किराए का एग्रीमेंट किया। चंडीगढ़ के रहने वाले ललित मोहन बाकायदा इनसे प्रतिमाह किराया लेते रहे।
फाइल निकलवाई तो सच आया सामने
हुडा के अतिरिक्त उपमंडल अभियंता राजबीर सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले वह प्लॉट नंबर-10 में खड़े होने वाले ट्रक को हटवाने आए थे। उन्होंने देखा कि प्लॉट नंबर 9 में कुछ अवैध निर्माण है।
उन्होंने कार्यालय में जाकर इस फैक्टरी की फाइल निकलवाई। फाइल निकलवाते ही सारा मामला सामने आ गया। उन्होंने यह मामला इस्टेट अधिकारी विराट के सामने रखा और इस्टेट अफसर विराट ने इस फैक्टरी को सील करने का आदेश जारी किया।
पांच करोड़ है जमीन की कीमत
हुडा के एक अधिकारी के अनुसार इंडस्ट्रियल एरिया में इस जमीन की कीमत करीब पांच करोड़ रुपये है। हुडा अधिकारी ने बताया कि इस मामले में जमीन को कब्जाने और उसे किराए पर उठाकर किराया वसूलने के मामले में कानूनी राय ली जाएगी और उसके बाद इस मामले में केस दर्ज करवाया जाएगा।
कब्जे वाली और भी हैं जमीनें
हुडा का इस्टेट कार्यालय अब इंडस्ट्रियल एरिया और रेजीडेंशियल एरिया में यह जानकारी हासिल कर रहा है कि किस जमीन पर कब्जा है।
हुडा के इस्टेट अधिकारी विराट ने बताया कि ऐसी जमीनों को खाली करवाया जाएगा और उसके आसपास चारदीवारी बना दी जाएगी या कंटीली तार के साथ खाई कर दी जाएगी, जिससे कि जमीन पर कब्जा न हो सके।