अपनी ट्रांसफर रुकवाने के लिए कर्मचारी पूरा जोर लगा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने ट्रांसफर किए जाने वाले कर्मचारियों की दूसरी लिस्ट भी तैयार कर ली है। सूत्रों के मुताबिक पहले 120 क्लर्कों को ट्रांसफर किया जाएगा। इसके बाद टाइपिस्टों के ट्रांसफर होंगे। दावा यहां तक किया जा रहा है कि एक बार सभी पदों पर बैठे अधिकारियों और बाबुओं को बदला जाएगा। चाहे वह गृह सचिव और वित्त सचिव का पर्सनल स्टाफ ही क्यों न हो।
ट्रांसफर होने के बाद बुधवार को कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधि पर्सोनल सेक्रेटरी केके जिंदल से मिले। लेकिन प्रशासन अपने फैसले पर अडिग है। प्रशासन ने सभी सचिव स्तर के अधिकारियों को भी इसके लिए सूचित कर दिया है। सभी सचिवों को कहा गया है कि अगर किसी कर्मचारी के जाने से विभाग का काम प्रभावित होता है तो वह बता सकते हैं। कुछ कर्मचारियों ने बुधवार को दोपहर तक नई जगह ज्वाइन भी कर लिया।
वहीं कुछ शाम तक इधर-उधर चक्कर काटते रहे। यूटी गेस्ट हाउस में सांसद किरण खेर से भी कुछ कर्मचारी मिले। कर्मचारियों की बात सुनने के बाद सांसद ने अधिकारियों से बात करने का आश्वासन दिया।
कैट में जाने की तैयारी
कुछ कर्मचारियों ने प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ कैट में जाने का मन बनाया है। बुधवार को इसके लिए कर्मचारियों ने पैसे भी एकत्रित किए। कर्मचारियों के फैसले के खिलाफ प्रशासन भी अपना तर्क रखने के लिए तैयार है। तर्क है कि किसी भी पब्लिक डीलिंग या सेंसटिव पोस्ट पर कर्मचारी को दो से तीन साल तक ही रखना चाहिए। सेंट्रल विजिलेंस कमीशन की भी यही गाइडलाइंस हैं।