कोर्ट ने इसके बाद पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता को लेकर आईपीएस अधिकारी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय, प्रबोध कुमार व कुंवर विजय प्रताप सिंह की एसआईटी गठित की थी। सुनवाई के दौरान पूर्व डीजीपी शशिकांत ने कहा कि यह मामला पंजाब में फैले नशे के कारोबार से जुड़ा हुआ है और पुलिस अधिकारियों को लेकर लंबित रिपोर्ट खोलने की मांग कोर्ट को इस दिशा से भटकाने का प्रयास है। रिपोर्ट खोलने की मांग करने वाले एडवोकेट नवकिरण ने कहा कि नशे के कारोबार में पुलिस अधिकारियों की भूमिका इन रिपोर्ट से सामने आती है। इन रिपोर्ट को इस मामले से अलग नहीं किया जा सकता।
पांच साल पहले सौंपी थी सीलबंद रिपोर्ट
एसआईटी ने अपनी तीन सीलबंद रिपोर्ट हाईकोर्ट में 2018 में सौंप दी थी। इसके साथ ही एक चौथी रिपोर्ट भी सौंपी गई थी, जिससे बाकी के दो आईपीएस ने खुद को अलग करते हुए हस्ताक्षर से इन्कार कर दिया था। लंबे समय से इन रिपोर्ट को खोलने की मांग चल रही थी। इसी बीच एडवोकेट नवकिरण सिंह ने इस मामले में अर्जी दाखिल कर इन्हें खोलने की मांग की थी। हाईकोर्ट में अब इन रिपोर्ट के खुलने के बाद नशा तस्करी से जुड़े लोगों पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।