चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी व क्रिक की ओर से आयोजित ‘चंडीगढ़ साइंस कांग्रेस चेसकॉन 2020’ के दूसरे दिन शुक्रवार को देश-दुनिया के वैज्ञानिकों ने रिसर्च पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विज्ञान को आगे बढ़ाने के लिए अनुसंधान को आगे बढ़ाना होगा। देश के वैज्ञानिकों ने कहा कि विज्ञान की दृष्टि से देश भी तभी आत्मनिर्भर बनेगा, जब रिसर्च बेहतर होंगे। इस अवसर पर आईआईटी रोपड़ के वरिष्ठ प्रोफेसर असित के चक्रवर्ती ने एंटी ट्यूबरकुलर दवा विकसित करने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जल्द ही टीबी की दवा को लेकर बड़ी सफलता हाथ लगेगी।
लिस्बन विश्वविद्यालय के प्रो. पाउला विदिरा ने जीव विज्ञान में ग्लाइकन्स की भूमिका के बारे में जानकारी दी। आईआईएससी बैंगलोर के प्रोफेसर एन जयरामन ने कार्बोहाइड्रेट, रसायन विज्ञान और उपयोगी उत्पादों को विकसित करने के बारे में जानकारी दी। आईआईसीटी मुंबई के एफआरएस प्रो. एमएम शर्मा ने रासायनिक उद्योग व उनकी प्रौद्योगिकी के बारे में बताया। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से प्रो. निगेल ह्यूजेस ने हिमालयी क्षेत्र में किए गए रिसर्च को सामने रखा। उन्होंने हिमालयों के बनने के कारण व उसकी बढ़ती ऊंचाई के बारे में बताया।
इसी कार्यक्रम के तहत पीयू के फार्मास्युटिकल विभाग ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विषय पर चर्चा आयोजित की। यूआईपीएस की चेयरपर्सन प्रोफेसर इंदु पाल कौर ने सभी का स्वागत किया। पीयू के डीन रिसर्च के प्रोफेसर विवेक रंजन सिन्हा ने दवाओं की लागत और प्रभावी विकास के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया। डॉ. गिरीश टिल्लू, वैद्य-वैज्ञानिक फेलो सेंटर फॉर कॉम्प्लीमेंटरी एंड इंटीग्रेटिव हेल्थ, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, महाराष्ट्र ने नई स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए एकीकृत चिकित्सा पर जानकारी दी। इस दौरान ई-पोस्टर प्रतियोगिताओं हुई और उनका मूल्यांकन विशेषज्ञों ने किया।