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सीनेट चुनाव और सिंडिकेट की बैठक न करवाने पर हाईकोर्ट में केस दायर, पीयू से मांगा जवाब

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट के चुनाव और सिंडिकेट की बैठक आयोजित नहीं करने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। सिंडिकेट और पूर्व सीनेटरों ने सभी तथ्यों को लेते हुए हाईकोर्ट में केस दर्ज किया है। इस मामले में हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर पीयू से जवाब मांगा है। माना जा रहा है कि सिंडिकेट का कार्यकाल खत्म होने से पहले पीयू को सिंडिकेट सदस्यों की शारीरिक रूप से मौजूद होकर बैठक करवानी पड़ सकती है। हालांकि यह पीयू के जवाब पर निर्भर करेगा।
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अगस्त में सीनेट के चुनाव करवाने के लिए नामांकन आदि की प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई थीं, लेकिन उसी दौरान सीनेट चुनाव स्थगित कर दिया गया। अगली तिथि भी सीनेट चुनाव के लिए तय की गई, लेकिन वह भी स्थगित हो गईं। इसके बाद सीनेट की बैठक आयोजित करने की बात सामने आई। साथ ही सीनेट चुनाव की तिथि घोषित करने की मांग की गई, लेकिन पीयू प्रशासन ने इस पर कोई विचार नहीं किया। इसके लिए छात्रों व पूर्व सीनेटरों ने प्रदर्शन भी किया। इसी बीच सिंडिकेट के सदस्यों ने सिंडिकेट की बैठक आयोजित करने की मांग की, लेकिन उस पर भी निर्णय नहीं लिया गया। इसको लेकर वीसी व सिंडिकेट के सदस्यों की नोकझोंक भी हुई थी। पूर्व सीनेटरों व सिंडिकेट के सदस्यों की मांग पूरी नहीं हुई तो उन्होंने हाईकोर्ट जाने का रास्ता अपनाया।
हाईकोर्ट जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ तो पीयू को लग सकता है झटका
सूत्रों का कहना है कि इन सभी की ओर से हाईकोर्ट में केस दायर किया गया है। अब तक सीनेट चुनाव के लिए हुए प्रदर्शन आदि को भी इसमें शामिल किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि पीयू के अधिकांश लोग सीनेट चुनाव करवाना चाहते हैं, लेकिन पीयू प्रशासन इस मांग पर काम नहीं कर रहा है। पूरे घटनाक्रम को हाईकोर्ट के समक्ष रखा गया है। सूत्रों का कहना है कि हाईकोर्ट में केस दायर हो गया है। अब पीयू को नोटिस का जवाब देना है। यदि हाईकोर्ट पीयू के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ तो फिर सिंडिकेट की बैठक भी करवानी पड़ सकती है और सीनेट चुनाव की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।
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करवाई जा सकती थी सिंडिकेट की बैठक
सूत्रों का कहना है कि सिंडिकेट में 15 सदस्य हैं। इन सभी की बैठक शारीरिक रूप से उपलब्ध होकर कराई जा सकती थी। यदि कोरोना का खतरा था तो किसी बड़े हॉल में या खुले स्थान पर करवाई जा सकती थी। बताया जाता है कि पीयू के अधिकारियों की मंशा ही नहीं थी कि सिंडिकेट की बैठक हो जबकि पीयू में कई बैठकें हुई हैं। माना जा रहा है कि सिंडिकेट सदस्यों का हक मारा गया है। ऐसे में उन्हें हाईकोर्ट से भी राहत मिल सकती है। मालूम हो कि सिंडिकेट का कार्यकाल 31 दिसंबर को पूरा होने जा रहा है। उसी के साथ पीयू भी सीनेट रिफॉर्म पर जोर दे रही है। इस पर भी निर्णय जनवरी में आ सकता है। वहीं दूसरी ओर बोर्ड ऑफ गवर्नेंस लागू करने को लेकर अभी कोई पुख्ता जानकारी नहीं आई है।
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