वूमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड के खातों के ऑडिट में बड़ी खामियां सामने आई हैं। इससे कारपोरेशन की कार्यशैली पर कई बड़े सवाल उठ रहे हैं। ऑडिट विभाग ने कहा है कि कारपोरेशन ने अपनी बैलेंस शीट सही ढंग से मेंटेन नहीं की है। इसके चलते करोड़ों के लेन देन में गड़बड़ी है। जिन लोगों ने या फिर कारपोरेशन ने जिस किसी से लोन का लेनदेन किया है। इसका कोई ब्योरा विभाग के पास उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते प्रशासन को करोड़ों की चपत लगने की उम्मीद है।
जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ महिला एवं बाल विकास विभाग ने जो लोन दिए हैं, उन्हें अपडेट तक नहीं किया गया है। डिपार्टमेंट के रिकार्ड और बांटे गए लोन पूरी तरह से मिलान में नहीं आ रहे हैं। कारपोरेशन ने इनकम टैक्स रिटर्न फाइल ही नहीं की। ऑडिट को इससे यह जांचने में दिक्कत पेश आ रही है कि कारपोरेशन पर कितना इनकम टैक्स बनता है।
यहां जताई जा रही घपले की आशंका
ऑडिट डिपार्टमेंट ने पाया कि टेलीफोन, इलेक्ट्रिसिटी और वॉटर के चार्जिस का खर्चा कैश बेसिस पर दिखाया गया। आशा किरण, जुवेनाइल जस्टिस होम, चाइल्ड हेल्पलाइन, स्नेहालय जैसे संस्थानों के लिए दी गई ग्रांटों व बैंकों में मौजूद क्लोजिंग बैलेंस सही नहीं हैं। इनमें जो बैलेंस खर्च नहीं किया गया वह अलग दिखाया गया है। जबकि बैंकों के पास जो बैलेंस पड़ा है वह कहीं ज्यादा है। इसमें बड़े घपले के आसार नजर आ रहे हैं।
ऑडिट विभाग ने दी जानकारी
गरीब और विकलांग लोगों को जो लोन दिए गए हैं उन्हें सही तरीके से नहीं पूरा किया गया है। इनका लोन रिकार्ड और लेखा जोखा नहीं होने के चलते कारपोरेशन को करोड़ों रुपये का चूना लगने की आशंका जताई गई है। यह जानकारी ऑडिट विभाग द्वारा सेक्टर 27 के रहने वाले आरटीआई एक्टीविस्ट आरके गर्ग ने हासिल की है।
हाल ही में एडवाइजर ने कसे थे पेच
चंडीगढ़ ऑडिट विभाग ने हाल ही में यूटी प्रशासन के कई विभागों का ऑडिट किया था। इस ऑडिट को लेकर एडवाइजर परिमल राय ने सब विभागों की मीटिंग भी ली थी। उन्होंने सब विभागों को आदेश दिया था कि ऑडिट विभाग की जरूरतों के मुताबिक सारे कागजात या सवालों के जवाब उन्हें उपलब्ध कराए जाएं।