यहां तक कि फाइलें भी बेतरतीब ढंग से मिली। कैग ने दोनों विश्वविद्यालयों से कॉलेजों में भर्ती सभी छात्रों का पंजीकरण डाटा प्राप्त किया। जब छात्रवृत्ति हासिल कर चुके छात्रों के साथ डाटा का मिलान किया गया तो पाया कि दोनों कॉलेजों ने धोखाधड़ी से छात्रवृत्ति पाई है। 2549 छात्रों जिनका विश्वविद्यालयों ने पंजीकरण किया ही नहीं, उन्हें और 304 सामान्य व अन्य श्रेणियों के छात्रों को 8.28 करोड़ की छात्रवृत्ति प्रदान कर दी।
जांच में 550 अन्य छात्रों को किए गए 1.77 करोड़ रुपये के भुगतान का पंजीकरण डाटा तो मिला, लेकिन इन सभी के पाठ्यक्रम अलग-अलग पाए गए। इसके अलावा विभिन्न कॉलेजों के 2425 छात्रों को 1.77 करोड़ रुपये के भरण पोषण भत्ते का भुगतान भी विफल रहा है।
प्रधान महालेखाकार की जांच रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं
हरियाणा के प्रधान महालेखाकार लेखा परीक्षा हरियाणा ने बीते वर्ष 23 अक्टूबर को ऑडिट जांच रिपोर्ट उच्चतर शिक्षा विभाग के महानिदेशक को कार्रवाई के लिए भेज दी थी। अभी तक महानिदेशक कार्यालय ने गलत तरीके से हासिल की गई छात्रवृत्ति मामले में कार्रवाई की है या नहीं, कैग को कोई जवाब नहीं भेजा है।