एससी की बेटी शादी के बाद भी एससी श्रेणी में नौकरी पाने की हकदार है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह अहम फैसला एचपीएससी द्वारा अनुराधा की असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर उम्मीदवारी को खारिज करने को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा करते हुए सुनाया है। एचपीएससी ने जाति प्रमाणपत्र पर पिता का नाम न होने के चलते अनुराधा का इंटरव्यू लेने से इनकार कर दिया था।
झज्जर निवासी अनुराधा ने याचिका दाखिल करते हुए कहा कि हरियाणा पब्लिक सर्विस कमिशन (एचपीएससी) ने असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला था। विज्ञापन के अनुरूप अनुराधा ने लिखित परीक्षा पास कर ली थी और उसे इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। लेकिन इंटरव्यू लेने से मना कर दिया गया। इसके पीछे दलील यह दी गई कि उसके जाति प्रमाणपत्र पर पिता का नाम नहीं है, पति का नाम है।
इसके खिलाफ अनुराधा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए इस फैसले को चुनौती दी। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि एससी पिता की बेटी नौकरी हासिल करने के लिए शादी के बाद भी एससी श्रेणी में आवेदन करने की हकदार होती है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की घटनाएं और सामने न आएं इसलिए अब हरियाणा सरकार सभी संबंधित विभागों को यह आदेश जारी करे कि जाति प्रमाणपत्र बनाते हुए पति के साथ पिता का नाम भी अंकित किया जाए।
ऐसे में अब विवाहिता का जाति प्रमाणपत्र बनाते हुए पति के साथ पिता का नाम भी अंकित होगा। इस मामले में याचिकाकर्ता के इंटरव्यू की अंतिम तिथि थी इसलिए हाईकोर्ट ने अपने आदेशों की कॉपी चीफ सेक्रेटरी को सौंपने के आदेश दिए और याची को इंटरव्यू में शामिल करने के आदेश जारी किए।