चंडीगढ़ सेक्टर-51 में नगर निगम के पेट्रोल पंप के लिए आवंटित भूमि पर लगे 24 हरे पेड़ों पर गुपचुप तरीके से आरी चला दी गई। पेड़ों के ठूंठों को छिपाने के लिए उन पर मिट्टी का लेप तक लगा दिया गया। हालांकि, जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पेड़ों को काटने से पहले प्रशासन से अनुमति ली गई है।
बता दें कि हाल ही में नगर निगम और सिटको की आय बढ़ाने के लिए यूटी प्रशासन ने चार पेट्रोल पंप खोले जाने की स्वीकृति दी थी। इसके लिए एस्टेट ऑफिस की ओर से नगर निगम और सिटको को शहर में दो-दो स्थानों पर भूमि आवंटित की गई थी। सेक्टर 51 में एमसी को आवंटित भूमि पर लगभग 10 वर्ष पुराने हरे पेड़ लगे हुए थे।
इनमें 20 पेड़ों का रखरखाव वन विभाग और 4 पेड़ों का जिम्मा नगर निगम के पास था। पंप निर्माण के लिए इन हरे पेड़ों को गुपचुप तरीके से काट दिया गया। हैरानी की बात यह है कि पेड़ों के ठूंठ को छिपाने के लिए इन पर मिट्टी का लेप लगा दिया। वहीं, कुछ पेड़ों की जड़ों को जेसीबी से निकाल दिया गया। विकास के नाम पर शहर में अभी तक 1000 से अधिक हरे पेड़ों को काटा जा चुका है। पर्यावरणविदों ने हरे पेड़ों के काटे जाने पर सवाल खड़े किए हैं।
जानकारी लेकर ही बताऊंगा
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। जांच के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी।
- देवेंद्र दलाई, चीफ कंजरवेटर, वन विभाग
हो सकता था पेड़ों का रिप्लांटेशन
उद्यान विशेषज्ञ राहुल महाजन ने हरे पेड़ों को काटे जाने पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि हरियाली के कारण ही शहर को ग्रीन सिटी का खिताब मिला हुआ है। प्रशासन को पेड़ों को काटने के बजाय रिप्लांट करना चाहिए था।