बड़े बिजनेस एंपायर हीरो ग्रुप के संस्थापक सत्यानंद मुंजाल अब हमारे बीच नहीं रहे। क्या आप जानते हैं कि उन्हें महात्मा के नाम से भी जाना जाता था। धार्मिक कार्यों में उनके योगदान के कारण ही करीब 12-13 साल पहले दिल्ली में संतों ने उनको महात्मा की उपाधि दी थी, तभी से ही महात्मा के तौर पर उनकी पहचान बन गई। वे सदा सादा जीवन व्यतीत करते थे। वे आर्य समाज मॉडल टाउन के प्रधान थे, जबकि आर्य प्रादेशिक प्रतिनिधि सभा के उपाध्यक्ष थे।
विज्ञापन
वे स्वामी सत्यानंद जी के जन्म स्थान पर बने टंकारा ट्रस्ट के भी चेयरमैन थे। माडल टाउन स्थित अपने निवास स्थान पर परिवार के सदस्यों का कहना है कि 99 वर्ष की उम्र में भी वे अपने दैनिक कार्य निपटाते थे। उनको सांस की तकलीफ थी। वे दो दिन तक हीरो डीएमसी हार्ट इंस्टीट्यूट में रहे और बुधवार सुबह ही वे अस्पताल से घर वापस आए थे, लेकिन आज सुबह उन्होंने अपनी जीवन यात्रा पूरी कर ली। उनकी पत्नी पुष्पा देवी का करीब दो साल पहले निधन हो गया था।
अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए महात्मा
उनके पांच बेटे हैं। जिनमें योगेश मुंजाल, सुरेश मुंजाल, सुधीर मुंजाल, उमेश मुंजाल एवं महेश मुंजाल शामिल हैं। इसके अलावा दो बेटी सुशेन चोपड़ा एवं नीलम चोपड़ा हैं। इनमें से सुशेन का पहले ही निधन हो चुका है।
विज्ञापन
पहले हवन करते थे, बाद में होता था नाश्ता
सत्यानंद मुंजाल के दामाद अरूण थापर ने कहा कि अंतिम वक्त तक भी वे आर्य समाज के प्रचार एवं प्रसार में लगे रहे। वे नित्य पहले हवन करते थे और नाश्ता भी बाद में लेते थे। उन्होंने लुधियाना में आर्य समाज की 18 से अधिक शाखाओं का गठन कराया।
सत्यानंद मुंजाल का शिक्षा के क्षेत्र में था अहम योगदान
हीरो साइकिल ग्रुप के संस्थापक सत्यानंद मुंजाल का निधन
- फोटो : फाइल फोटो
सत्यानंद मुंजाल के बेटे सुरेश मुंजाल ने कहा कि बाबू जी का शिक्षा, धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में अहम योगदान रहा। शहर में बीसीएम स्कूल की आठ शाखाएं उन्हीं के नेतृत्व में चलती रही। इसके अलावा आरएस मॉडल स्कूल, आर्य कन्या गुरुकुल स्कूल, बीसीएम कालेज को आगे ले जाने में भी उनका ही योगदान रहा। आर्य कन्या गुरुकुल में आर्थिक तौर पर कमजोर बच्चियों को मुफ्त में शिक्षा दी जाती है।
संतों ने दी थी महात्मा की उपाधि-सुरेश मुंजाल
सुरेश मुंजाल ने कहा कि उन्होंने आर्य समाज के विस्तार के लिए अपना जीवन लगा दिया। धार्मिक कार्यों में उनके योगदान के कारण ही करीब 12-13 साल पहले दिल्ली में संतों ने उनको महात्मा की उपाधि दी थी, तभी से ही महात्मा के तौर पर उनकी पहचान बन गई। वे सदा सादा जीवन व्यतीत करते थे। वे आर्य समाज मॉडल टाउन के प्रधान थे, जबकि आर्य प्रादेशिक प्रतिनिधि सभा के उपाध्यक्ष थे।
वे स्वामी सत्यानंद जी के जन्म स्थान पर बने टंकारा ट्रस्ट के भी चेयरमैन थे। कुछ साल पहले जब हीरो परिवार में बंटवारा हुआ था तो महात्मा सत्यानंद मुंजाल के बेटों के पास सत्यम ऑटो, मुंजाल शोवा, मैजेस्टिक ऑटो लिमिटेड एवं हाईवे इंडस्ट्रीज इत्यादि कंपनियां आई थी। उनके बेटे इन कंपनियों को बेहतर ढंग से आगे बढ़ा रहे हैं।
हीरो ग्रुप को अपनी मेहनत से सींचा सत्यानंद मुंजाल ने
हीरो साइकिल्स के संस्थापाक सत्यानंद मुंजाल का निधन
- फोटो : फाइल फोटो
काबिलेजिक्र है कि बंटवारे से कुछ साल पहले पाकिस्तान के गांव कमालिया से चार भाई सत्यानंद मुंजाल, दयानंद मुंजाल, बृजमोहन लाल मुंजाल एवं ओम प्रकाश मुंजाल ने पहले अमृतसर में साइकिल पार्ट्स का कारोबार शुरू किया। इसके बाद लुधियाना में आकर साइकिल बनाने की इकाई लगाई। विश्व में सबसे अधिक साइकिल बनाने को लेकर हीरो साइकिल्स का नाम गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज है। चारों भाईयों के आपसी तालमेल, मेहनत, लगन और दूरदर्शिता के चलते ही हीरों ग्रुप ने देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में नाम कमाया।
अतीत के पन्नों में दर्ज हो गए हीरो ग्रुप के चारों स्तंभ
महात्मा सत्यानंद मुंजाल ने हीरो साइकिल्स को बुलंदियों तक पहुंचाने में अहम योगदान किया था। कई साल पहले दयानंद मुंजाल का निधन हो गया था। पिछले एक साल के दौरान बृज मोहन लाल मुंजाल, ओपी मुंजाल के बाद अब सत्यानंद मुंजाल ने अपनी जीवन यात्रा पूरी कर ली। इस तरह से हीरो ग्रुप के चारों स्तंभ अतीत के पन्नों में दर्ज हो गए, लेकिन उनकी सोच और सीख आज भी परिवार का मार्ग दर्शन कर रही है।