दो मर्डर केस, 3 साल 10 महीने में 136 बार सुनवाई हुई और सतलोक आश्रम का रामपाल दोषी करार दे दिया गया। अब उसे 3 धाराओं के तहत कड़ी सजा सुनाई जा सकती है। केस नंबर 429 और 430 के हत्याओं के मामलों में कुल 136 बार सुनवाई हुई। तीन साल 10 महीने और 22 दिन तक चली सुनवाई में वीरवार को सभी आरोपी दोषी करार दिए गए। केस नंबर 429 के तहत मामला दर्ज होने से लेकर फैसले तक अदालत में कुल 64 बार सुनवाई हुई। केस नंबर 430 में फैसले तक कुल 72 सुनवाई अदालत में हुई।
धाराओं के तहत सजा का प्रावधान
धारा 302: हत्या के दोषी को फांसी या आजीवन कारावास और आर्थिक दंड का प्रावधान है। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। आईपीसी धारा 343: दोषी अपराध में तीन दिन तक शामिल है तो दो वर्ष का कारावास, आर्थिक दंड का प्रावधान है। आईपीसी धारा 120बी: जब किसी अपराध को साजिश करके अंजाम दिया जाता है तो दोषियों को दो वर्ष कारावास और आर्थिक दंड का प्रावधान है।
- वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश कालीरामणा के अनुसार
फैसले से पहले बोले रामपाल के वकील
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अदालत में फैसले से पहले रामपाल व अन्य के वकील जेके गक्खड़ ने अदालत में कहा कि घटना के समय पुलिस की ओर से आंसू गैस के 59 गोले छोड़े गए। इसके अलावा चिल्ली गैस के 28 गोले छोड़े गए। वाटर कैनन का प्रयोग किया गया। इसके कारण सफोकेशन हुई, जिससे कुछ लोगों की मौत हुई। उन्होंने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में भी मौत का कारण सफोकेशन बताया गया है।
इसके अलावा उन्होंने जज को कहा कि जो लोग इस घटनाक्रम में मरे थे, वे हेल्दी नहीं थे, किसी न किसी बीमारी से पीड़ित थे। यह मामला होमीसाइड नहीं था, कोई बाहरी इंजरी नहीं थी। सरकारी वकील राजीव सरदाना व नरेंद्र सिंह ने बताया कि इस मामले में जज ने फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है। अकसर सजा सुनाने के समय न्यायाधीश द्वारा टिप्पणी की जाती है।
उन्होंने बताया कि न्यायाधीश ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के देखते हुए आरोपियों को दोषी करार दिया है। जज ने यह मानते हुए कि दोषी ठहराए गए रामपाल व अन्य ने कम जगह में ज्यादा लोगों को रोका हुआ था। उन्हें रामपाल ने खुद की सुरक्षा के लिए बंधक बनाया हुआ था।केस में सरकार की ओर से चार वकील, जबकि रामपाल पक्ष की ओर से 11 वकीलों ने पैरवी की।
सरकार की ओर से वकील महेंद्र पाल, ओमप्रकाश, नरेंद्र कुमार, राजीव सरदाना ने पैरवी की। रामपाल पक्ष की ओर से एमएस नैन समेत कई वकील पैरवी कर रहे थे।
दोनों केसों में इन सभी को दोषी करार दिया गया
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केस नंबर 429 में दोषी
केस के तहत 15 आरोपियों पर आईपीसी की धारा 302, 343 और 120बी के तहत केस दर्ज किया था। इसमें छह मुख्य आरोपियों आश्रम संचालक सोनीपत के गांव धनाना का रामपाल, उसका बेटा विरेंद्र उर्फ विजेंद्र, हिसार के गांव उगालन निवासी जोगेंद्र उर्फ बिल्लू, भिवानी के इमलौटा गांव निवासी राजकपूर उर्फ प्रीतम, सोनीपत के गांव बढ़गांव निवासी राजेंद्र व बरवाला की बबीता के अलावा गुरुग्राम निवासी देवेंद्र, सिरसा निवासी जगदीश, पानीपत निवासी खुशहाल सिंह, जींद निवासी सतबीर व सोनू दास, सिरसा निवासी सुखबीर, भिवानी की पूनम, जींद निवासी सावित्री, गुरुग्राम के सूरत नगर का अनिल को दोषी करार दिया है।
केस नंबर 430 में दोषी
मुकदमा नंबर 430 में 14 आरोपियों पर आईपीसी की धारा 302, 343 और 120बी के तहत केस दर्ज किया था। मामले में आश्रम संचालक सोनीपत के गांव धनाना का रामपाल, उसका बेटा विरेंद्र उर्फ विजेंद्र, हिसार के गांव उगालन निवासी जोगेंद्र उर्फ बिल्लू, भिवानी के इमलौटा गांव निवासी राजकपूर उर्फ प्रीतम, सोनीपत के गांव बढ़गांव निवासी राजेंद्र, बरवाला की बबीता के अलावा झज्जर निवासी कृष्ण कुमार, हिमाचल के किन्नौर निवासी बलवान व पवन, सोलन निवासी राजीव शर्मा, राजस्थान के समरपुर पाली निवासी राजेश और रमेश, राजस्थान के उदयपुर वासी नटवरलाल उर्फ लक्ष्मण, कुरुक्षेत्र निवासी रामचंद्र को अदालत ने दोषी करार दिया।
मामले में कुल 981 को बनाया था आरोपी
रामपाल
- फोटो : File Photo
प्रकरण में करीब 981 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से 935 को जमानत मिल चुकी है। करीब 945 ने ट्रायल फेस किया। करीब 36 लोग इस मामले में पीओ घोषित हैं। प्रकरण से रामपाल समेत जुड़े 13 लोग जेल में हैं।
दोनों केसों में कुल 70 गवाह पेश हुए
केस नंबर-429 व 430 में कुल 70 गवाह पेश किए गए। एडवोकेट राजीव सरदाना ने बताया कि केस नंबर 429 में 45 गवाह पेश किए गए, जबकि 430 नंबर केस में 25 गवाह पेश हुए थे। इनमें से अधिकांश गवाह पुलिस अधिकारी और डॉक्टर थे, जो मौके पर मौजूद थे। इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाने वाले 6 गवाहों ने बयान बदल दिए थे।
तीन बार लगाई जमानत याचिका, हर बार खारिज
रामपाल ने अपने केस की सुनवाई करने के लिए कोर्ट बदलने की अपील की थी, लेकिन उसे अदालत ने खारिज कर दिया था। इसी प्रकार रामपाल ने अपनी जमानत के लिए पहले जिला न्यायालय में अर्जी लगाई थी, जो खारिज होने के बाद हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका डाली थी। सभी जगह से उसकी जमानत की याचिका खारिज कर दी गई थी।