मेयर राजेश कालिया की अध्यक्षता में हुई नगर निगम सदन की पहली बैठक में ही उन्हें साथी पार्षद का ही दुर्व्यवहार झेलना पड़ा। मेयर चुनाव में भाजपा से बगावत कर कालिया के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले पार्षद सतीश कैंथ ने सदन की सारी मर्यादा तोड़ डाली। कैंथ ने मेयर के लिए जैसे ही अभद्र भाषा का प्रयोग किया, पूरा सदन उनके विरोध में खड़ा हो गया। बैठक के शुरू होते ही सभी पार्षद राजेश कालिया को मेयर बनने की बधाई देने लगे।
इस बीच भाजपा पार्षद शक्ति प्रकाश देवशाली ने मेयर को बधाई देते हुए कहा की भाजपा ही ऐसी पार्टी है जिसमें एक चाय वाला देश का प्रधानमंत्री और कागज बीनने वाला शहर का मेयर बन सकता है जबकि अन्य पार्टियों में तो परिवारवाद ही हावी है और उनके नेता विभिन्न घोटालों में फंसे हैं। उनके इतना कहते ही कांग्रेस के पार्षद बबला ने खड़े हो गए और उनकी इस बात पर कड़ा एतराज जताया और कहा की यहां भी कई पार्षदों के घोटालों की लिस्ट विजिलेंस के पास पड़ी है। इस बीच कैंथ भी बोलने लगे और कांग्रेस व भाजपा पार्षद आपस में भिड़ गए।
सबसे पीछे बैठाने पर भड़के कैंथ
सतीश कैंथ ने मेयर से कहा कि उनकी सीट सदन में सबसे पीछे क्यों लगाई गई है जबकि अब वह भाजपा पार्षद नहीं हैं। ऐसे में उन्हें पहली कतार में जगह मिली चाहिए। इस पर भाजपा पार्षद भरत ने एतराज जताते हुए कहा की पहले ही दिन मेयर को धमकाया जा रहा है, यह कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पार्षदों में आपसी बहस को देख मेयर कालिया ने कैंथ से मर्यादा में रहकर अपनी बात कहने और बैठ जाने को कहा। इस पर कैंथ भड़क उठे और मेयर से अभद्रता शुरू कर दी। इस पर पूरा सदन कैंथ के विरोध में उतर आया।
सभी का यही कहना था कि कैंथ को मेयर की कुर्सी की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए था। कैंथ को जब सदन ने घेर लिया तो मेयर ने स्थिति संभाली और कहा कि कैंथ उनके छोटे भाई जैसे हैं और उनको कोई व्यक्तिगत गुस्सा है है तो वह उन्हें अपने घर बुला सकते हैं या मेरे पास आकर बात कर सकते हैं। लेकिन यहां उन्हें मेयर की कुर्सी की मर्यादा को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए। कांग्रेस पार्षद देवेंद्र सिंह बबला ने कहा की कैंथ की और से वह माफी मांगते हैं। इस पर भाजपा पार्षदों ने कहा की कैंथ को ही माफी मांगनी चाहिए।