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Haryana News: बाल विवाह पर रोक लगाएंगे सरपंच और पार्षद, महिला आयोग ने सरकार को भेजा प्रस्ताव

Fri, 07 Apr 2023 11:49 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हरियाणा में 2020 के बाद बाल विवाह में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2015-2016 में बाल विवाह की दर 12.5 प्रतिशत थी, जो 2019-20 में बढ़कर 19.4 प्रतिशत हो गई। अगले साल में यह दर लगभग समान रही। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक प्रदेश में वर्ष 2019 में बाल विवाह के 20 मामले सामने आए थे।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हरियाणा राज्य महिला आयोग ने बाल विवाह को लेकर बड़ा फैसला किया है। आयोग की ओर से कहा गया है कि ग्रामीण एरिया में सरपंच और शहरी क्षेत्रों में पार्षद बाल विवाह रोकने का काम करेंगे। पिछले सात सालों का आंकड़ा देखें तो बाल विवाह के मामलों में सात प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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2022 में राष्ट्रपति बाल विवाह को पूरी तरह अमान्य करने वाले हरियाणा के कानून को अपनी मंजूरी दे चुके हैं। इस कानून के लागू होने के बाद 15 से 18 साल के लड़के और लड़की के बीच वैवाहिक संबंध पूर्ण रूप से अवैध हैं। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद बाल विवाह प्रतिषेध (हरियाणा संशोधन) विधेयक 2020 लाया गया था।

हरियाणा के दो जिले ऐसे हैं जो देश में इस मामले में सबसे ज्यादा पिछड़े हैं। इनमें मेवात और हिसार जिले शामिल हैं। राष्ट्रीय स्तर की एक संस्था के द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के मुताबिक मेवात और हिसार में बाल विवाह और कम उम्र में किशोरियों के गर्भधारण के अधिकतर मामले गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों से जुड़े हैं। इनमें कई जातियां ऐसी हैं जिनमें बाल विवाह की परंपरा है। जिसको अभी तक निभाया जा रहा है।
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हरियाणा में 2020 के बाद बाल विवाह में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2015-2016 में बाल विवाह की दर 12.5 प्रतिशत थी, जो 2019-20 में बढ़कर 19.4 प्रतिशत हो गई। अगले साल में यह दर लगभग समान रही। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक प्रदेश में वर्ष 2019 में बाल विवाह के 20 मामले सामने आए थे, जो 2020 में बढ़कर 33 पर पहुंच गए। 2021 में इन मामलों में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

बच्चों की तस्करी तीन गुना बढ़ी
वर्ष 2021 में बच्चों की तस्करी में तीन गुना बढ़ोतरी हो गई, जब बच्चों की चोरी के 21 मामले सामने आए। इनमें 20 लड़कियां और एक लड़का शामिल है। इसी तरह बच्चों की गुमशुदगी में भी बढ़ोतरी हुई है। पिछले तीन सालों में बच्चों के लापता होने के मामले 17 प्रतिशत बढ़े हैं। 2019 में बच्चों के लापता होने के 2815 मामले सामने आए, जबकि 2021 में 2343 केस दर्ज हुए।

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