1980 में सरदूल ने पहला गीत ‘आ गई रोडवेज दी लारी’ रिकॉर्ड हुआ। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनका गाना ‘हुसना दे मालकों’ लोगों को इतना पसंद आया कि उसके 400 मिलियन कैसेट बिके थे। इसे हीरा साउंड ने रिकॉर्ड किया था। इसके बाद सरदूल रेडियो और टीवी पर भी छा गए।
फतेहगढ़ साहिब में होता था जलसा
एक इंटरव्यू में सरदूल ने कहा था कि एक बार एक प्रसिद्ध म्यूजिक कंपनी ने उन्हें बाहर निकाल दिया था। बावजूद इसके उनका हौसला नहीं टूटा। सरदूल ने 60 वर्ष की उम्र में इतने अवार्ड हासिल कर लिए कि वह सुरों के मालिक कहलाने लगे। फतेहगढ़ साहिब की शहीदी सभा में सरदूल सिकंदर को सुनने वालों का जलसा भी होता था। पंजाब के रवायती पहनावे चादरा-कुर्ते और शमले वाली पगड़ी के साथ उनकी पेशकश को लोग खूब पसंद करते थे।
केंद्र व राज्य सरकार के मान्यता प्राप्त कलाकार थे सरदूल
फतेहगढ़ साहिब के पूर्व लोक संपर्क अधिकारी कृष्ण कश्यप ने बताया कि सरदूल सिकंदर समेत तीनों भाई पंजाब व केंद्र सरकार के मान्यता प्राप्त कलाकार थे। वह अक्सर सूचना एवं प्रसारण विभाग की ओर से मिले कार्यक्रम में गांव-गांव जाकर सरकार की स्कीमों को घर-घर पहुंचाते थे। साथ ही गीत-संगीत से लोगों का मनोरंजन भी करते थे।
रोपड़ के गांव भरतगढ़ निवासी सरदूल सिकंदर की पत्नी अमर नूरी ने हर कदम पर पति का साथ दिया। 2016 में सरदूल की किडनी खराब होने पर नूरी ने अपनी किडनी देकर उनकी जान बचाई थी। 17 मार्च को लुधियाना के एक अस्पताल में उनका ऑपरेशन किया गया था। सरदूल सिकंदर के पैतृक गांव खेड़ी नौध सिंह (फतेहगढ़ साहिब) में गुरुवार को उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
पंजाबी गायक बलकार सिद्धू ने जताया शोक
पंजाबी गायक सरदूल सिकंदर के निधन पर पंजाबी गायक बलकार सिद्धू ने दुख जताया है। उन्होंने कहा कि उनकी कमी को पूरा नहीं किया जा सकता। जब उन्हें इस बारे में पता चला तो उन्हें बहुत दुख हुआ और एकदम वो समय याद आ गया जब सरदूल सिकंदर से उनकी मुलाकात हुआ करती थी। सिद्धू ने कहा कि इस दुख की घड़ी में पूरी पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री एवं गायकी जगत सिकंदर के परिवार के साथ खड़ी है।