फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरबत खालसा 10 को, देखिए कौन आएगा कौन नहीं?

Sat, 07 Nov 2015 02:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
विज्ञापन
विज्ञापन
10 नवंबर को पंजाब के अमृतसर में सरबत खालसा का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन पंथक संगठनों को सरबत खालसा में पूर्ण समर्थन और सहायता देने वाले दमदमी टकसाल के एक ग्रुप के मुखी बाबा हरनाम सिंह धुम्मा ने अब सरबत खालसा से हाथ पीछे खींच लिए हैं।
विज्ञापन


वीरवार को टकसाल के मेहता हेडक्वार्टर में उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के साथ धुम्मा की एक गुप्त बैठक के बाद यह बदलाव आया है। बाबा हरनाम सिंह धुम्मा ने कहा कि सरब खालसा श्री अकाल तख्त साहिब पर ही बुलाया जा सकता है। अगर इसे किसी और जगह बुलाया जाता है तो यह सिख पंथक रिवायतों के हिसाब से गलत होगा।

इसे यहीं न रोका गया तो भविष्य में कभी भी कुछ संगठनों का समूह कहीं भी बैठक बुलाकर उसे सरबत खालसा का नाम दे सकता है। बाबा धुम्मा संत समाज के भी नेता हैं। उन्होंने कहा कि वह और दमदमी टकसाल सरबत खालसा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यह श्री अकाल तख्त साहिब पर ही बुलाया जाए, तभी उसकी सार्थकता है।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि हम सरबत खालसा संस्था के पुनर्गठन के पक्ष में हैं। पंथ के अंदर इस पर सहमति भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भी सरबत खालसा बुलाया गया तब सिख कौम के सामने गंभीर चुनौतियां थी। पंथक मामलों पर सहमति लेने के लिए सरबत खालसा बुलाया जाता है।

कनाडा और अमेरिका के सिख करेंगे शिरकत
कनाडा और अमेरिका के सिख भी सरबत खालसा में शिरकत करेंगे। वहां के करीब 100 सिख संगठनों के प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व कर रहे हरिंदर सिंह, मंजीत सिंह उप्पल, मंजीत सिंह बराड़ और यादविंदर सिंह ने कहा है कि विदेशों में बसे सिख भी श्री अकाल तख्त साहिब को राजनीतिक व सरकारी प्रभाव से मुक्त चाहते हैं।

वह शुक्रवार को यहां पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस वक्त वह महसूस करते हैं कि श्री अकाल तख्त साहिब पर राजनीतिक और सरकारी दखलंदाजी अधिक है। इसलिए वह चाहते हैं कि कोई ऐसी व्यवस्था बने, जिसके तहत दखलंदाजी बंद हो और श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता बहाल रहे। इसलिए सिख संगठनों ने उन्हें अपना प्रतिनिधि बनाकर यहां भेजा है।

वह आगामी 10 नवंबर को अमृतसर में हो रहे सरबत खालसा में शिरकत करेंगे और सभी के विचार जानेंगे। कहा कि वह मसले पर सरकार सहित सभी संबंधित पक्षों से चर्चा करने की कोशिश भी करेंगे। नई व्यवस्था से संबंधित फैसला जल्दबाजी में नहीं, बल्कि व्यापक चिंतन के बाद ही लिया जाना चाहिए।

इसकी घोषणा अगले साल बैसाखी पर होनी चाहिए। उधर, ज्ञानी दित्त सिंह मिशनरी ग्रुप के कुलदीप सिंह गड़गज्ज और गुरभेज सिंह ने बताया कि वह भी अपने 500 साथियों के साथ सरबत खालसा में शामिल होंगे। कहा कि इस वक्त सरबत खालसा बुलाया जाना समय की जरूरत थी।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें