रामपाल के ‘घपलों और रहस्यों’ का परत-दर-परत खुलासा हो रहा है। जिला मुख्यालय से 12 किमी. दूर रोहतक-झज्जर रोड पर करौंथा स्थित सतलोक आश्रम नियमों को ताक पर रखकर बनाया गया। जिला प्रशासन पर मजबूत पकड़ रखने वाले और शातिर दिमाग रामपाल ने न तो आश्रम के लिए सीएलयू (चेंज ऑफ लेंड यूज) कराया और न ही इसका नक्शा पास कराया गया।
नेशनल हाइवे 71 पर बने इस आश्रम का निर्माण कृषि भूमि में किया गया है। आश्रम निर्माण की कोई स्वीकृति भी नहीं ली गई है। प्रशासन की नाक के नीचे इस भवन का निर्माण हो गया और अफसर सोते रहे। करौंथा आश्रम की जमीन को लेकर धोखाधड़ी का मामला भी कोर्ट में विचाराधीन है।
संत रामपाल की गिरफ्तारी को लेकर बवाल भले ही बरवाला के सतलोक आश्रम में हुआ हो, लेकिन पूरे मामले के तार करौंथा आश्रम से जुडे़ रहे। 1999 में बने इस आश्रम के निर्माण में सभी नियमों को दरकिनार कर दिया गया और सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का भी चूना लगाया गया।
बरवाला का सतलोक आश्रम भी अवैध
12 एकड़ में 5-6 साल पहले बरवाला में बना सतलोक आश्रम अवैध है। इसका कोई नक्शा पास नहीं है। रोहतक के करौंथा में 2006 में हुए बवाल के तीन साल बाद ही बरवाला में करीब 12 एकड़ जमीन पर आश्रम का निर्माण किया गया।
अब आश्रम के कागज खंगाले जाने पर इसके अवैध होने का पता चला है। पांच साल से आजतक आश्रम के बारे में किसी ने सुध नहीं ली। हिसार के तत्कालीन उपायुक्त एमएल कौशिक ने बताया था कि आश्रम का कोई भी नक्शा पास नहीं हुआ।
दान में मिली थी कृषि जमीन
बताया जा रहा है कि राजेंद्र नाम के एक अनुयायी की ओर से करौंथा में करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन रामपाल दास के ट्रस्ट को दान में दी गई थी। जमीन को लेकर ट्रस्ट के नाम से गिफ्ट डीड भी तैयार कराई गई। इस ट्रस्ट की ओर तैयार कराई गई गिफ्ट डीड में भी जमीन को कृषि भूमि ही दिखाया गया है।
आलीशान आश्रम बनता रहा, अफसर सोते रहे
गिफ्ट में मिली कृषि भूमि पर
सतलोक आश्रम का निर्माण कर दिया गया और अफसर सोते रहे। करोड़ों रुपये की
लागत से बने इस आश्रम में सबकुछ आलीशान है। बिना सीएलयू और नक्शा पास किए
ही आश्रम रातोंरात खड़ा कर दिया गया।
आश्रम नेशनल हाइवे से सटा है। नेशनल
हाइवे के करीब 25 से 50 मीटर तक कोई निर्माण नहीं किया जा सकता। इस तरह से
यहां नेशनल हाइवे के शेड्यूल्ड रोड एक्ट एवं रुल्स की भी अवहेलना की गई है।
कई बार कर चुके हैं शिकायत
करौंथा आश्रम में जमीन को लेकर धोखाधड़ी मामले व आर्य समाज के वकील एडवोकेट नरेंद्र कटारिया ने बताया कि आश्रम निर्माण में नियमों की अनदेखी की शिकायतें कई बार सरकार और प्रशासन से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कृषि भूमि के किसी अन्य प्रयोग करने के लिए सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) लेना अनिवार्य है। निर्माण का विकास शुल्क जमा करवाना भी अनिवार्य है। तब सीएलयू मिलता है। लेकिन आश्रम के निर्माण के लिए न तो सीएलयू लिया है और न ही कोई नक्शा पास कराया गया है। यह पूरी तरह अवैध है।
दलबीर सिंह, एसडीएम, रोहतक कहते हैं...
‘करौंथा स्थित सतलोक आश्रम के निर्माण में किस तरह की लापरवाही बरती गई है, इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी सामने आएगा, नियमानुसार और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।’