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जमानत पर रिहा होते होते रह गया रामपाल!

Tue, 09 Dec 2014 03:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
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करोड़ों की लागत से बने सतलोक आश्रम के मुखिया और लाखों अनुयायियों का दावा करने वाला संत रामपाल आज अकेला है। जिसके दर्शन के लिए भक्तों की लाइनें लगी रहती थीं और जिसकी एक आवाज पर सैकड़ों अनुयायी अपनी जान तक न्यौछावर करने के लिए तैयार रहते थे, उस रामपाल से हवालात से लेकर कचहरी में पेशी तक कोई मिलने भी नहीं आता। हाल यह है कि करोड़ों की प्रॉपर्टी के मालिक को मात्र 20 हजार रुपये का जमानती भी नहीं मिल रहा है।
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सोमवार को बरवाला पुलिस ने जब रामपाल को कोर्ट में पेश किया तो बरवाला थाने में दर्ज मुकदमा नंबर 427 में उन्हें बेल मिल गई। यह मुकदमा सरकारी कार्य में बाधा डालने को लेकर दर्ज किया गया था, लेकिन रामपाल के वकील ने बेल बांड भरने से इंकार कर दिया।
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वकील ने बांड भरने से इंकार कर दिया

इसके बाद उन्हें देशद्रोह व सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने के दोनों मामलों में न्यायिक हिरासत में भेजा गया। कोर्ट में बेल की अर्जी लगाए जाने के मामले पर जब कोर्ट ने 20 हजार रुपये के बांड भरवाने के लिए कहा तो रामपाल की जमानत लेने वाला ही कोई पेश नहीं हुआ। इस पर वकील ने बांड भरने से इंकार कर दिया।

जमानती पड़ सकता है कानूनी पचड़े में
कानूनी जानकारों का कहना है कि जमानत लेने वाले को अपनी जिम्मेवारी के आधार पर कोर्ट जमानत देती है। इस मामले में रामपाल को 20 हजार रुपये के बांड पर जमानत दी जानी थी। जिसमें 20 हजार रुपये या फिर इतनी कीमत की प्रॉपर्टी के बांड भरवाए जाते हैं। जब बेल के निर्धारित समय के बाद अभियुक्त कोर्ट के समक्ष पेश न हो तो जमानती व अभियुक्त दोनों को नोटिस भेजे जाते हैं। वकीलों की मानें तो ऐसे मामले में कोर्ट जमानती पर जुर्माना भी लगा सकती है।

रामपाल के आश्रम के केस में पुलिस को झटका

सतलोक आश्रम मामले में सोमवार को कोर्ट में रामपाल की पेशी के दौरान उसे जहां रिमांड पर हासिल करने में पुलिस सफल रही, वहीं एक अन्य मामले में उसे झटका भी लगा। पुलिस की तरफ से रामपाल के दौलतपुर स्थित दूसरे आश्रम में गोवंश व अन्य सामान की नीलामी करवाने के लिए लगाई गई एप्लीकेशन जेएमआईसी प्रतीक जैन की अदालत ने खारिज कर दी।

पुलिस की तरफ से दलील दी गई थी कि दौलतपुर आश्रम में भी रामपाल का लाखों रुपये कीमत का सामान है। क्यों न उस सामान की बोली करवाकर रुपये ट्रेजरी में जमा करवा दिए जाएं तथा खराब सामान को नष्ट करवा दिया जाए।

इस पर कोर्ट के समक्ष रामपाल के वकील मनोज सैनी व अभिषेक चौधरी ने कहा कि रामपाल की दौलतपुर आश्रम की संपत्ति की देखभाल करने वाले लोग हैं। वहां सैकड़ों की संख्या में गाय व बछड़े हैं, जिनकी देखभाल रामपाल की तरफ से करवाई जा सकती है। कोर्ट ने दोनों पक्षों के तथ्य सुनने के बाद कहा कि पुलिस को अभी इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती वहां क्या क्या है। पहले पुलिस उसे अपने कब्जे में ले। पुलिस के कब्जे में लिए जाने के बाद ही कोर्ट की कार्रवाई बनेगी।
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पुलिस का पक्ष नहीं आया काम

पुलिस ने कोर्ट के सामने दलील दी कि दौलतपुर आश्रम सतलोक आश्रम से इंटर कनेक्टेड है। सतलोक आश्रम से ही उस आश्रम में पानी की सप्लाई जाती है। इसके अलावा अन्य कई ऐसी सुविधाएं हैं जो सतलोक आश्रम पर ही आधारित हैं।
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गायों के लिए चारे की व्यवस्था करने की दी अनुमति
दौलतपुर आश्रम में रखी गई सैकड़ों गायों के लिए चारे की व्यवस्था करने के लिए रामपाल के वकील को अनुमति दे दी गई है। रामपाल के वकील ने कहा था कि आश्रम में रखी गई गाय भूखी हैं।

इस पर पुलिस की ओर से वकील को कहा गया कि वे अपने कुछ आदमी भेजकर चारे की व्यवस्था करवा सकते हैं, लेकिन वे उन्हीं लोगों को आश्रम में प्रवेश करने देंगे जिनका नाम पुलिस के पास पहले से भेजा जाएगा।
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