जेल में बंद रामपाल ने बिना मुद्रक और प्रकाशक वाली 34 पेज की एक किताब में पुलिस प्रशासन पर तो हमला बोला ही है, साथ में योग गुरु बाबा रामदेव को भी लपेटा है। रामपाल ने पुराने अंदाज में न्याय पालिका पर भी सवाल उठाए हैं। अपने ऊपर दर्ज मुकदमों के बारे में पूरा स्पष्टीकरण भी दिया है।
किताब बरवाला की घटना की सच्चाई शीर्षक से प्रकाशित की गई है। पहले पेज पर जहां बल और पद का दुरुपयोग न करने की बात को न कहते हुए जैन धर्म की एक सत्य कथा प्रकाशित की गई है, वहीं सबसे अंतिम पेज पर गुलामी की यादें ताजा करते हुए गांधीवाधी सुब्बाराव के कुछ सवालों का जिक्र किया गया है।
बाबा रामदेव को बताया पीटीआई
रामपाल समर्थकों की ओर से बांटी गई किताब में पेज 20 पर बाबा राम देव को एक पीटीआई बताया गया है। बाबा रामदेव का भारत की जनता पर उपकार शीर्षक से कहा गया है कि किसान और मजदूरों को योग करने की कोई आवश्यकता नहीं है। बाबा रामदेव एक मेडिसन मर्चेंट है।
किताब में कहा गया कि हम यह नहीं कहना चाहते थे, बाबा राम देव घृणित व्यक्ति हैं, बल्कि कहना चाहते हैं कि जितना उनको मीडिया ने उठा रखा है, वास्तव में उतना योग्य नहीं है। रामदेव पर योग के लिए ली जाने वाली फीस पर भी उपहास किया गया है। तीन पेजों पर बाबा रामदेव पर कई तरह के तंज कसे गए हैं।
पांच सदस्यीय टीम ले गई माल लूटकर
किताब में पेज नंबर 18 पर बरवाला आश्रम की घटना का जिक्र करते हुए बताया गया है कि हिसार के एक पुलिस अधिकारी ने प्रतिशोध लिया है। क्योंकि रामपाल ने इन पर कोर्ट की अवमानना का केस दायर किया था। सतलोक आश्रम प्रकरण की जांच के लिए जो पांच अधिकारियों की टीम बनाई गई थी, उन्होंने भक्तों को लूटा, पीटा और झूठे मुकदमे बनाए।