खुद के नियम लागू करने में कतरा रहा पीजीआई
बता दें पीजीआई प्रशासन ने पिछले दिनों बेहोशी की दवा से हुए मौत प्रकरण में निक्सी कंपनी की दवा के बारे में संबंधित दवा के दुकान संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। उसमें कहा गया था कि दुकान पर बिकने वाली दवाओं की गुणवत्ता ठीक न मिलने पर टेंडर समाप्त किया जा सकता है। इसके जवाब में दुकान संचालक ने सभी आवश्यक प्रमाण पत्र पीजीआई को सौंपे थे लेकिन अब पीजीआई अपने ही नियम को खुद को लागू करने से कतरा रहा है। नियॉन कंपनी की दवा का नमूना फेल होने के बाद भी उसके साथ हुआ अनुबंध अब भी बरकरार है।
नियॉन लैब की इस दवा का नमूना हुआ है फेल
- प्रोपोफॉल आईपी 10 एमजी
- पंजीकरण नंबर- एलएसडी/आरडीटीएल/393/22-23
- बैच नंबर- 340160
- निमार्ण तिथि- जनवरी 2022
- समाप्ति तिथि- दिसंबर 2023
- मैन्युफैक्चर- नियॉन लैब्रोटरीज लिमिटेड
- पीएच- 5.62 (लिमिट 6.0 से 8.5)
पीएच का मानक क्यों जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार बेहोशी की दवा में पीएच स्तर अनियमित होने पर झुनझुनी, मांसपेशियों में ऐंठन, कमजोरी, दौरे, दिल की अनियमित धड़कन, हाइपो या हाइपरवेंटिलेशन, मानसिक स्थिति पर प्रभाव और कोमा की स्थिति हो सकती है।
कंपनी के दवा के नमूने फेल होने की रिपोर्ट अब तक हमारे संबंधित विभाग को प्राप्त नहीं हुई है। अगर किसी तरह की गड़बड़ी मिली तो मानक के अनुसार कार्रवाई होगी। - कुमार गौरव, डीडीए व प्रवक्ता पीजीआई।