एनआईए की विशेष अदालत द्वारा बहुचर्चित समझौता एक्सप्रेस बम धमाके के मामले में दिए गए फैसले को पाकिस्तानी महिला ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। पाक महिला ने अपनी याचिका में कहा कि एनआईए अदालत का फैसला खामियों से भरा हुआ है और इसे सुनाते हुए अदालत ने जूडीशियल माइंड का प्रयोग नहीं किया।
भारत और पाकिस्तान के बीच सप्ताह में दो दिन चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी 2007 को धमाका हुआ था। यह ट्रेन दिल्ली से अटारी जा रही थी। पानीपत के दीवाना स्टेशन के नजदीक अचानक इस ट्रेन में विस्फोट हो गया जिसमें 68 लोगों की मौत और 12 लोग घायल हुए थे। धमाके में जान गंवाने वालों में अधिकतर पाकिस्तानी नागरिक थे।
मारे गए 68 लोगों में 16 बच्चों समेत चार रेलवे कर्मी भी थे। एनआईए कोर्ट ने 20 मार्च को केस के आरोपी स्वामी असीमानंद, लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजेंद्र चौधरी को सबूतों के अभाव में निर्दोष मान बरी कर दिया था। अब पाकिस्तानी महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा है कि इस मामले में फैसला खामियों से भरा है और इंसाफ नहीं किया गया है।
महिला ने अपने वकील मोमिन के माध्यम से यह याचिका दाखिल की है और फिलहाल यह हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में है। अगर याचिका पर रजिस्ट्री ने कोई आपत्ति नहीं लगाई तो संभवत: अगले सप्ताह हाईकोर्ट सुनवाई कर सकता है।