बहुचर्चित समझौता ब्लास्ट मामले में नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की अदालत में सुनवाई हुई।
फरवरी 2007 में पानीपत के दीवाना रेलवे स्टेशन के पास हुए बम धमाकों के बाद घटनास्थल से हुई विस्फोटकों की बरामदगी और बम डिफ्यूज करने सहित इस मामले की छानबीन से जुड़े तत्कालीन तीन विशेषज्ञों के बयान दर्ज किए गए। इसमें बम विस्फोट के बाद जिंदा बम को डिफ्यूज करने, जांच संबंधी रिपोर्ट के अलावा ब्रीफकेस की लिखावट को लेकर भी बयान दर्ज कराए गए।
समझौता ब्लास्ट के दौरान सीआईडी के तत्कालीन डीएसपी अरविंद हुडा ने कोर्ट के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए। अपने बयान में उन्होंने मौका ए वारदात से मिले विस्फोटकों के तार, बोतल सहित धमाके के बाद एक और बम डिफ्यूज करने की पुष्टि की।
ब्लास्ट मामले की छानबीन से जुड़े एफएसएल मधुबन के तत्कालीन असिस्टेंट डायरेक्टर गुलशन राय ने भी अदालत के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए। उन्होंने घटना के वक्त मौके से बरामद ब्रीफकेस पर हाथ से अपोलो-600 लिखे होने की पुष्टि की। इसी ब्रीफकेस में विस्फोटक होने की आशंका जताई गई थी।
इस मामले की जांच से जुड़ी अधिकारी लवलीन कत्याल ने माना कि विस्फोट से जुड़ी जांच की रिपोर्ट उन्होंने पेश की थी। उन्होंने ब्रीफकेस पर की गई लिखावट इकबाल के होने की पुष्टि की, जो इंदौर में ब्रीफकेस कवर की बिक्री किया करता था। इस मामले में दो अन्य गवाह पेश नहीं हो सके।
मुकेश गर्ग ने बताया कि इस मामले में अगली तारीख पर पांच गवाहों से समन किए गए हैं। इस मामले में अब तक 152 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। एनआईए के वकील आरके हांडा ने बताया कि विस्फोटकों को लेकर डीएसपी के बयान दर्ज किए गए हैं। अगली सुनवाई के लिए छह-सात नवंबर की तारीख मुकर्रर की गई है।