फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डॉ. मधु के हौसले को सलाम... 17 दिन में कोरोना को मात देकर फिर से जुटीं मरीजों की इलाज पर

Tue, 06 Oct 2020 11:37 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
डॉ मधु - फोटो : CHANDIGARH
विज्ञापन
चंडीगढ़ स्थित जीएमएसएच-16 की मेडिकल ऑफिसर डॉ. मधु सभ्ररवाल ड्यूटी के दौरान बीते 23 अगस्त को कोरोना की चपेट में आ गईं। कोरोना संक्रमित होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी सकारात्मक सोच के बल पर 17 दिन बाद कोरोना को मात देकर दोबार ड्यूटी पर लौट आईं। डॉ. मधु के साथ उनके दोनों बच्चे भी कोरोना पॉजिटिव हो गए थे। उस दौरान पति भी उनके साथ नहीं थे। ऐसे में उन्होंने अकेले खुद के साथ ही अपने दोनों बच्चों और बुजुर्ग सास-ससुर की देखभाल करते हुए कोरोना को हराकर जिंदगी की जंग जीत ली।
विज्ञापन


पॉजिटिव होने के दौरान भी मधु घर से ही अस्पताल से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को निभा रही थीं। मधु का कहना है कि कोरोना महामारी के इस दौर में हमें अपने घर के साथ ही अस्पताल की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का भी निर्वहन करना है। ऐसी स्थिति में अगर हम कमजोर पड़ गए तो बाकी लोगों को हिम्मत कौन देगा। डॉ. मधु ने अपनी बहादुरी और धैर्य के कारण ही अपने घर और अस्पताल में अपनी एक अलग छवि बनाई है।

दिन-रात की ड्यूटी, घर भी संभाला
डॉ. मधु ने बताया कि कोरोना के शुरुआती दौर में जब उनकी ड्यूटी अस्पताल की इमरजेंसी में लगी तब उन्हें खुद को संक्रमण से बचाते हुए मरीजों की देखभाल करनी थी। मेडिकल ऑफिसर होने के कारण उनकी कभी दिन में तो कभी रात में ड्यूटी लगती है। ऐसी स्थिति में उन्हें अस्पताल के साथ ही अपने परिवार की भी जिम्मेदारियां अकेले ही उठानी पड़ती हैं। डॉ. मधु के पति डॉ. रमेश कुरुक्षेत्र के सरकारी अस्पताल में कार्यरत हैं। वह हफ्ते या दो हफ्ते में एक बार चंडीगढ़ आ पाते हैं। फिर भी मधु ने कभी भी खुद को कमजोर साबित नहीं होने दिया और अस्पताल में ड्यूटी के साथ घर को भी पूरी जिम्मेदारी के साथ संभाला।
विज्ञापन


यह आराम का नहीं, दोगुने जज्बे से काम करने का समय है
पॉजिटिव होने के बाद डॉ. मधु ने 17 दिन बाद अपनी दोबारा जांच कराई। इसकी रिपोर्ट निगेटिव आने पर उन्होंने 18वें दिन से ड्यूटी ज्वाइन कर ली। संक्रमण के बाद बिना आराम किए फिर काम पर लौट आने के बारे में डॉ. मधु का कहना है कि यह वक्त आराम करने का नहीं बल्कि दोगुने जज्बे से कोरोना से जंग के लिए तैयार रहने का है। डॉ. मधु ने बताया कि उस वक्त कोरोना के कारण अस्पताल के काफी स्टाफ और डॉक्टर पॉजिटिव हो गए थे। ऐसे में डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी परेशानी का कारण बन रही थी इसलिए उन्होंने खुद से पहले अपने फर्ज के बारे में सोचा।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें